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जामिया में 16 दिन से भूखे छात्र, प्रशासन की जिद से ठप पढ़ाई—केसी वेणुगोपाल ने उठाई आवाज

छात्र संघ की बहाली की मांग पर आंदोलन जारी, बिजली-पानी काटने और सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने पर कांग्रेस महासचिव ने प्रशासन को घेरा

राष्ट्रीय/ शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर 16 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे छात्रों का आंदोलन अब विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लोकतांत्रिक तरीके से चुना जाने वाला छात्र संघ मांगने वाले विद्यार्थियों को आखिर कब तक अनसुना किया जाएगा? छात्रों की मांग पर बातचीत करने के बजाय सख्त रवैया अपनाने से विश्वविद्यालय में पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने राजनीतिक सशक्तीकरण और छात्र संघ की बहाली चाहते हैं, ताकि उनकी समस्याओं और मांगों को लोकतांत्रिक मंच मिल सके।

16 दिन से भूखे छात्र, प्रशासन कब सुनेगा?

छात्र संघ की बहाली कोई असाधारण मांग नहीं है। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने और अपनी समस्याएं संगठित तरीके से उठाने का अवसर मिलना चाहिए। जब छात्र इस अधिकार की मांग को लेकर लगातार भूख हड़ताल कर रहे हों, तब प्रशासन की प्राथमिकता बातचीत और समाधान होनी चाहिए।

लेकिन वेणुगोपाल के बयान के मुताबिक, जामिया प्रशासन छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने के बजाय सख्ती का रास्ता अपना रहा है। 16 दिनों से जारी भूख हड़ताल अपने आप में गंभीर स्थिति है। छात्रों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरे को नजरअंदाज करके इस गतिरोध को लंबा खींचना किसी भी शैक्षणिक संस्थान के हित में नहीं है।

बिजली-पानी बंद करने और ऑनलाइन पढ़ाई पर सवाल

केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि परिसर में बिजली और पानी की आपूर्ति काटी गई तथा सभी कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गईं। यदि आंदोलन के बीच विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। बिजली-पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं को लेकर छात्रों को परेशानी का सामना क्यों करना पड़े? और विद्यार्थियों की पढ़ाई को आंदोलन के दबाव में क्यों बाधित होना चाहिए?

सभी कक्षाओं को ऑनलाइन करने से भी परिसर की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना और विचारों को विकसित करना है, न कि छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव को ऐसा रूप देना जिसमें पढ़ाई ही प्रभावित होने लगे।

छात्रों को बदनाम करने की कोशिश क्यों?

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है और कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी है।

छात्रों की मांग का जवाब उनकी नीयत पर सवाल उठाकर नहीं, बल्कि ठोस बातचीत से दिया जाना चाहिए। छात्र संघ की बहाली पर प्रशासन का रुख क्या है? चुनाव कराने में बाधा क्या है? और विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर कब मिलेगा? इन सवालों पर स्पष्ट जवाब जरूरी है।

VC और रजिस्ट्रार की जवाबदेही तय हो

जामिया प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनना और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखना भी है। जब छात्र लगातार भूख हड़ताल कर रहे हों और पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही हो, तब कुलपति और रजिस्ट्रार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

प्रशासन को छात्र संघ की बहाली पर स्पष्ट समयसीमा देनी चाहिए, छात्रों से तत्काल बातचीत करनी चाहिए और आंदोलन के कारण पैदा हुए शैक्षणिक गतिरोध को समाप्त करना चाहिए। यदि बिजली-पानी की आपूर्ति रोकने जैसे कदम उठाए गए हैं, तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

छात्र संघ की बहाली पर फैसला जरूरी

केसी वेणुगोपाल ने अधिकारियों से छात्रों की मांगें स्वीकार करने की अपील की है। उनका समर्थन इस आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है। लेकिन सबसे अहम सवाल जामिया के विद्यार्थियों के भविष्य का है।

16 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर अनसुने हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को जवाब देना होगा। छात्रों की आवाज दबाने या उन्हें बदनाम करने से समस्या समाप्त नहीं होगी। समाधान छात्र संघ की बहाली पर गंभीर बातचीत, स्पष्ट निर्णय और जवाबदेही से ही निकलेगा।

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