राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | तिरुवनंतपुरम | 26 अक्टूबर 2026
केरल के कोच्चि स्थित ‘काशी आर्ट कैफे’ को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस में बदल गया है। उत्तर प्रदेश के व्लॉगर अमृत सिंह डैरेन ने कैफे के अंदर की एक कलाकृति और वहां बीफ परोसे जाने को लेकर वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने कैफे में महात्मा गांधी और पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की कलाकृति पर आपत्ति जताई और कैफे के नाम को लेकर भी सवाल उठाए।
इस घटना के बाद केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी CPI(M) ने राज्य की धर्मनिरपेक्ष पहचान और सांप्रदायिक सद्भाव के पक्ष में आवाज उठाई। बीजेपी ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में क्या होना चाहिए, इसका फैसला केवल मलयाली लोग करेंगे। हालांकि, बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया, जो उसके अनुसार ‘भारत-विरोधी बयान’ दे रहे हैं।
कैफे के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, व्लॉगर अमृत सिंह डैरेन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कैफे के अंदर का वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में गांधी और जिन्ना की कलाकृति दिखाई गई। व्लॉगर ने जिन्ना की तस्वीर को राष्ट्रीय गौरव का अपमान बताया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हिंदुओं के पवित्र शहर काशी के नाम पर चलने वाले कैफे में बीफ के व्यंजन क्यों परोसे जाते हैं और कैफे का नाम क्यों नहीं बदला जाना चाहिए।
वीडियो सामने आने के बाद फोर्ट कोच्चि पुलिस ने व्लॉगर के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस कार्रवाई और विवाद ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं तथा सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर चर्चा तेज कर दी।
कांग्रेस और CPM ने धर्मनिरपेक्ष पहचान का मुद्दा उठाया
इस विवाद में कांग्रेस और CPI(M) का एक साथ आना खास माना जा रहा है। दोनों दल केरल की धर्मनिरपेक्ष परंपरा और विभिन्न समुदायों के बीच सह-अस्तित्व की बात कर रहे हैं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस मामले में दोनों ने ऐसी कोशिशों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें किसी कैफे, उसकी कलाकृति या भोजन के आधार पर पूरे समुदाय को निशाना बनाया जा सकता है।
केरल में खान-पान, कला और धार्मिक पहचान को लेकर बहस लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। लेकिन किसी प्रतिष्ठान के नाम या उसके मेन्यू को लेकर विवाद को पूरे समुदाय के खिलाफ अभियान में बदलना सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है।
BJP का रुख: फैसला केरल के लोग करेंगे
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल के बारे में निर्णय लेने का अधिकार मलयाली लोगों को है। साथ ही, पार्टी ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया, जो उसके अनुसार भारत-विरोधी बयान दे रहे हैं।
इस तरह बीजेपी ने एक ओर स्थानीय लोगों के निर्णय के अधिकार की बात की, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। विवाद पर पार्टी का रुख कांग्रेस और CPI(M) से अलग राजनीतिक दृष्टिकोण को सामने लाता है।
कला, भोजन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
‘काशी आर्ट कैफे’ का विवाद केवल एक प्रतिष्ठान के नाम या वहां परोसे जाने वाले भोजन तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि किसी कला-स्थल में प्रदर्शित कलाकृति की व्याख्या कैसे की जाए और भोजन की पसंद को धार्मिक या राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की सीमा क्या होनी चाहिए।
किसी कलाकृति से असहमति जताना या किसी प्रतिष्ठान के बारे में सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन किसी दावे के आधार पर समुदायों के प्रति व्यापक शत्रुता पैदा करना अलग मामला है। ऐसे विवादों में तथ्यों की जांच, कानून के अनुसार कार्रवाई और शांतिपूर्ण संवाद महत्वपूर्ण हैं।
राजनीतिक टकराव के बीच सामाजिक सद्भाव की परीक्षा
इस घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में एक ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया है, जिस पर अलग-अलग दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है। कांग्रेस और CPI(M) ने धर्मनिरपेक्ष पहचान पर जोर दिया है, जबकि बीजेपी ने राज्य सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाया है।
फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच विवाद का केंद्र यही है कि कला, भोजन और धार्मिक प्रतीकों को लेकर असहमति किस तरह व्यक्त की जाए, ताकि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव प्रभावित न हों।



