[the_ad id="179"]
Home » National » E100 ईंधन को मंजूरी, लेकिन हर पेट्रोल कार में नहीं डाल सकेंगे 100% एथेनॉल

E100 ईंधन को मंजूरी, लेकिन हर पेट्रोल कार में नहीं डाल सकेंगे 100% एथेनॉल

केंद्र ने मोटर वाहन नियमों में किया संशोधन, खास तकनीक से बनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ही इस्तेमाल कर सकेंगी E100; E20 कारों के लिए नियम नहीं बदले

राष्ट्रीय/ ऑटोमोबाइल/ टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026

भारत में एथेनॉल आधारित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और कदम उठाया है। सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर उन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए रास्ता साफ किया है, जो लगभग शुद्ध एथेनॉल यानी E100 तक के ईंधन पर चल सकते हैं। हालांकि, इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि देश में चल रही हर पेट्रोल कार में अब E100 भरा जा सकेगा।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए नियम का उद्देश्य विशेष रूप से तैयार और प्रमाणित वाहनों को अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति देना है। सामान्य पेट्रोल कार, जिसे E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए मंजूरी मिली है, उसमें E85 या E100 भरना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

E100 क्या है और E20 से कितना अलग?

E100 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग पूरा हिस्सा एथेनॉल होता है। इसके विपरीत, E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और बाकी मुख्य रूप से पेट्रोल होता है। एथेनॉल का इस्तेमाल ईंधन में करने का उद्देश्य पेट्रोल की खपत में कमी लाना और ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना है।

लेकिन एथेनॉल और पेट्रोल के गुण अलग होते हैं। इंजन, ईंधन पाइप, सील, इंजेक्शन सिस्टम और अन्य हिस्सों को उसी ईंधन के अनुरूप बनाया जाना जरूरी है, जिसका वाहन में इस्तेमाल होना है। इसलिए E100 पर चलने के लिए वाहन में विशेष तकनीकी बदलाव और प्रमाणन की जरूरत होती है।

क्या आपकी पेट्रोल कार में E100 डल सकेगा?

इस नियम का सबसे अहम पहलू यही है कि यह सभी मौजूदा पेट्रोल कारों को E100 इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता।

* E20 के लिए प्रमाणित सामान्य कार: उसमें E20 या वाहन निर्माता द्वारा अनुमोदित ईंधन ही इस्तेमाल करें।

* फ्लेक्स-फ्यूल वाहन: यदि वाहन विशेष रूप से E85 या E100 जैसे ईंधन के लिए डिजाइन और प्रमाणित है, तभी उसके अनुसार ईंधन इस्तेमाल किया जा सकता है।

* पुरानी कारें: केवल सरकारी नियम में बदलाव होने से पुरानी कार E100 के अनुकूल नहीं हो जाती।

वाहन मालिकों को अपनी कार की पुस्तिका, निर्माता के निर्देश और फ्यूल कैप पर दिए गए संकेतों के अनुसार ही ईंधन चुनना चाहिए। गलत ईंधन इस्तेमाल करने से इंजन और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचने का जोखिम हो सकता है।

जब E100 उपलब्ध है, तो पेट्रोल में एथेनॉल क्यों मिलाया जाता है?

यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि गाड़ियां लगभग शुद्ध एथेनॉल पर चल सकती हैं, तो पेट्रोल में 10 या 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की जरूरत क्यों है।

इसका जवाब वाहनों की तकनीकी क्षमता, ईंधन की उपलब्धता और मौजूदा ढांचे में छिपा है। देश में चल रहे अधिकतर पेट्रोल वाहनों को धीरे-धीरे अधिक एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल बनाना और उनके लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करना अलग चुनौती है। E100 का इस्तेमाल केवल उन वाहनों में संभव है, जिन्हें इसके लिए तैयार किया गया हो।

दूसरी ओर, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था मौजूदा ईंधन वितरण प्रणाली के जरिए बड़े पैमाने पर मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराने का रास्ता देती है। इसलिए E100 और E20 को एक-दूसरे का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा।

वाहनों के तकनीकी वर्गीकरण में भी बदलाव

मोटर वाहन नियमों में संशोधन के तहत कुछ तकनीकी और वाहन-वर्गीकरण प्रावधान भी बदले गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए वजन की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम की गई है।

यह बदलाव वाहन श्रेणियों और प्रमाणन से जुड़े नियमों का हिस्सा है। इसे E100 इस्तेमाल करने की अनुमति से अलग समझना चाहिए, क्योंकि किसी वाहन का ईंधन अनुकूल होना और उसका कानूनी वर्गीकरण दो अलग विषय हैं।

वाहन मालिक क्या ध्यान रखें?

E100 के लिए नियमों में बदलाव वैकल्पिक ईंधन तकनीक को आगे बढ़ाने का संकेत है, लेकिन आम वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी कार में केवल अनुमोदित ईंधन ही भरवाएं। E100 का नाम सुनकर सामान्य पेट्रोल कार में इसे आजमाना उचित नहीं है।

किसी वाहन में E100 का सुरक्षित इस्तेमाल तभी संभव है, जब निर्माता ने उसे इस ईंधन के लिए डिजाइन किया हो और संबंधित मानकों के तहत प्रमाणित किया गया हो। नए नियमों से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए अवसर बढ़ सकता है, लेकिन इसका लाभ हर मौजूदा पेट्रोल कार को अपने आप नहीं मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *