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ब्रिटेन में स्थायी निवास पाना अब आसान नहीं होगा! भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा असर

नई इमिग्रेशन नीति के तहत स्थायी निवास के लिए लंबी अवधि तक इंतजार करना पड़ सकता है, प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने ‘अर्न्ड सेटलमेंट’ के सिद्धांत का समर्थन किया

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 26 अक्टूबर 2026

ब्रिटेन में स्थायी निवास (Permanent Residence) हासिल करने के नियम सख्त किए जाने की तैयारी के बीच भारतीय प्रवासियों की चिंताएं बढ़ सकती हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा है कि देश में स्थायी निवास अपने आप मिलने वाला अधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए व्यक्ति को पात्रता साबित करनी चाहिए। उन्होंने ‘अर्न्ड सेटलमेंट’ यानी योग्यता और शर्तों के आधार पर स्थायी निवास देने के सिद्धांत का समर्थन किया है।

द हिंदू की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का भारतीय नागरिकों पर खास असर पड़ सकता है, क्योंकि ब्रिटेन में लंबे समय के लिए प्रवास करने वाले यूरोपीय संघ से बाहर के नागरिकों में भारतीय सबसे बड़ा समूह रहे हैं।

स्थायी निवास के लिए बढ़ सकती है समय-सीमा

ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री शबाना महमूद ने कीर स्टार्मर सरकार के कार्यकाल में पिछले साल इमिग्रेशन नियमों में बदलाव का मसौदा पेश किया था। इसमें स्थायी निवास के लिए सामान्य पात्रता अवधि को पांच साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव था।

प्रस्ताव के तहत सभी प्रवासियों को एक ही समय-सीमा में स्थायी निवास नहीं मिलेगा। उनकी आय, इमिग्रेशन नियमों के पालन और अन्य मानकों के आधार पर पात्रता अवधि कम या ज्यादा हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में अंतिम नियमों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए प्रस्तावित बदलावों को लागू हो चुके नियमों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भारतीय नागरिकों पर क्यों पड़ेगा असर?

ब्रिटेन भारतीय छात्रों, पेशेवरों और कामगारों के लिए प्रमुख गंतव्यों में से एक है। वहां लंबे समय तक रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए स्थायी निवास हासिल करना भविष्य की योजनाओं का अहम हिस्सा होता है।

यदि पात्रता अवधि बढ़ाई जाती है, तो भारतीय प्रवासियों को स्थायी निवास के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे नौकरी, परिवार के साथ रहने, आर्थिक योजना और ब्रिटेन में दीर्घकालिक भविष्य तय करने पर असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से उन लोगों को नए नियमों का प्रभाव समझना होगा, जो वर्तमान नियमों के तहत पांच साल में स्थायी निवास पाने की उम्मीद कर रहे हैं। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नीति में कौन-सी शर्तें तय होती हैं और वे किन प्रवासियों पर लागू की जाती हैं।

‘अर्न्ड सेटलमेंट’ का क्या मतलब है?

‘अर्न्ड सेटलमेंट’ का मूल विचार यह है कि स्थायी निवास केवल तय अवधि तक ब्रिटेन में रहने से न मिले, बल्कि आवेदक को कुछ अतिरिक्त मानकों पर भी खरा उतरना पड़े। प्रस्ताव में आय और इमिग्रेशन नियमों के पालन जैसे कारकों का उल्लेख किया गया है।

इसका अर्थ है कि भविष्य में स्थायी निवास की पात्रता व्यक्ति की परिस्थितियों और उसके रिकॉर्ड के आधार पर तय हो सकती है। हालांकि, किन मानकों को कितना महत्व दिया जाएगा और अलग-अलग श्रेणियों के प्रवासियों के लिए क्या नियम होंगे, यह अंतिम नीति से स्पष्ट होगा।

प्रवासी समुदाय की नजर अंतिम फैसले पर

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम का समर्थन इस बात का संकेत है कि स्थायी निवास के नियमों को लेकर सख्त रुख ब्रिटेन की इमिग्रेशन बहस का हिस्सा बना हुआ है। लेकिन किसी प्रस्ताव के समर्थन और उसके अंतिम रूप से लागू होने के बीच अंतर है।

भारतीय नागरिकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे प्रस्तावित नियमों और मौजूदा नियमों के बीच अंतर समझें। स्थायी निवास की योजना बना रहे लोगों को अपनी वीजा श्रेणी, पात्रता अवधि और आधिकारिक सरकारी दिशानिर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।

ब्रिटेन की नई इमिग्रेशन नीति का अंतिम स्वरूप तय करेगा कि भारतीय प्रवासियों को स्थायी निवास के लिए कितने समय तक इंतजार करना होगा और पात्रता हासिल करने के लिए किन शर्तों को पूरा करना पड़ेगा।

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