राष्ट्रीय/ सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
चीन सीमा पर निर्माण करे, उसकी सेना की गतिविधियां बढ़ें और सीमावर्ती गांवों के लोग अपनी जमीन को लेकर चिंता जताएं—लेकिन सवाल उठने पर जवाब मिले कि सीमा का सीमांकन नहीं है, इसलिए भ्रम की स्थिति है! केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान को लेकर यही सवाल उठ रहे हैं। चीन की गतिविधियों पर चिंता जताने के बजाय उसके लिए ‘सीमा तय नहीं’ का तर्क देना क्या भारत की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवालों को हल्का करना नहीं है?
कांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट में रिजिजू के हवाले से कहा गया है कि चीन ने किसी गांव पर कब्जा नहीं किया, बल्कि सीमांकन की अस्पष्टता के कारण कुछ जमीन पर डेरा डाला है। उसी पोस्ट में चीनी सेना द्वारा ढांचे और गांव जैसी इमारतें बनाए जाने, ऊंची पहाड़ियों पर उसकी गतिविधियां बढ़ने और स्थानीय लोगों की चिंता को जायज मानने की बात भी सामने रखी गई है।
चीन निर्माण करे, सरकार ‘भ्रम’ बताकर सवाल टाल दे?
यदि चीनी सेना ने विवादित इलाके में निर्माण किया है और उसकी गतिविधियां बढ़ी हैं, तो सरकार को साफ-साफ बताना चाहिए कि ये निर्माण कहां हुए, जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और भारतीय सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच तथा गश्त की स्थिति क्या है। केवल यह कह देना कि सीमा का सीमांकन स्पष्ट नहीं है, इन सवालों का जवाब नहीं है।
सीमा पर अस्पष्टता कोई नई समस्या नहीं है। लेकिन यही अस्पष्टता किसी दूसरे देश की सैन्य गतिविधियों को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करने का आधार नहीं बन सकती। भारत की जमीन और सुरक्षा से जुड़ा हर सवाल गंभीरता से लिया जाना चाहिए। चीन की गतिविधियों को लेकर सरकार का जवाब स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और पारदर्शी होना चाहिए।
लोंगजू में चीनी गतिविधियों पर उठे सवाल
अरुणाचल प्रदेश के लोंगजू (Longju) क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर भी विवाद सामने आया है। 19 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजिजू ने चीन के भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर तक घुस आने के दावे को खारिज किया था। उन्होंने ऐसी बातों को भारतीय सेना और सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाला बताया था। साथ ही, सीमा के सीमांकन की समस्या और ऊंची पहाड़ियों पर चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की बात भी कही थी।
यहां दो सवाल अहम हैं। पहला, चीन की गतिविधियों को लेकर लगाए जा रहे दावों की वास्तविक स्थिति क्या है? दूसरा, यदि सीमा पर चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ी हैं, तो सरकार ने उसका जवाब देने के लिए क्या कदम उठाए हैं? इनका उत्तर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रमाणित तथ्यों और आधिकारिक जानकारी से मिलना चाहिए।
स्थानीय लोगों की चिंता का जवाब कौन देगा?
सीमावर्ती गांवों के लोगों के लिए जमीन का सवाल महज नक्शे पर खींची गई रेखा नहीं है। यह उनकी सुरक्षा, आवाजाही, आजीविका और भविष्य से जुड़ा है। यदि ग्रामीण चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं, तो उनकी चिंता को गंभीरता से लेना सरकार की जिम्मेदारी है।
रिजिजू के बयान के हवाले से स्थानीय लोगों की चिंता को जायज बताए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि उनकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है और सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है। चीन के निर्माण और सैन्य गतिविधियों को लेकर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय बहस को सीमांकन की अस्पष्टता तक सीमित नहीं किया जा सकता।
गलवान के बाद भी वही सवाल
जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। उस समय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान—“न कोई हमारी सीमा में घुसा है…”—को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था। अब चीन की गतिविधियों पर बहस के बीच विपक्ष उसी प्रसंग का हवाला देकर सरकार से जवाब मांग रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाना देशविरोध नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों के साथ जवाब दे और यह स्पष्ट करे कि सीमा पर क्या हो रहा है। किसी भी दावे की पुष्टि जरूरी है, लेकिन पुष्टि की जरूरत का अर्थ यह नहीं कि सवाल पूछने वालों को चुप करा दिया जाए।
मोदी सरकार जवाब दे
चीन की सेना की गतिविधियों में बढ़ोतरी, सीमावर्ती क्षेत्र में निर्माण और स्थानीय लोगों की चिंता—इन तीनों मुद्दों पर केंद्र सरकार को स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए। यदि निर्माण भारतीय क्षेत्र में हुआ है, तो उसके बारे में क्या कार्रवाई की गई? यदि क्षेत्र विवादित है, तो भारत का आधिकारिक रुख क्या है? और यदि सीमांकन की अस्पष्टता के कारण भ्रम है, तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
देश को आश्वासन या सफाई भर नहीं, तथ्य चाहिए। भारत की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। चीन की गतिविधियों पर सवाल उठने पर सरकार का काम उन्हें हल्का करके पेश करना नहीं, बल्कि स्थिति स्पष्ट करना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।



