अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/जिनेवा | 13 अगस्त 2026
अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में बड़े बदलाव को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिंता जताई है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि अमेरिकी नीति में किए जा रहे बदलाव उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और सर्वोत्तम विज्ञान के अनुरूप नहीं दिखते। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वैक्सीन संबंधी नीतियां राजनीतिक प्रभाव के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए।
क्या बदला है अमेरिका में?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अगस्त को एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें बच्चों के लिए नियमित रूप से सुझाए जाने वाले टीकों की संख्या और उन्हें देने के समय/क्रम की समीक्षा का निर्देश दिया गया है। आदेश में MMR यानी खसरा, मम्प्स और रूबेला के संयुक्त टीके को अलग-अलग देने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही गई है।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि बच्चों को दिए जाने वाले टीकों की संख्या और कार्यक्रम को दूसरे विकसित देशों की नीतियों तथा कथित ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
WHO और विशेषज्ञों की आपत्ति क्या है?
WHO का कहना है कि किसी टीकाकरण नीति में बड़ा बदलाव मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए। WHO प्रमुख ने यह भी कहा कि MMR वैक्सीन सुरक्षित है और उपलब्ध प्रमाण इसे ऑटिज्म का कारण नहीं बताते।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) ने भी बदलाव का विरोध किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव के लिए कोई नया ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो मौजूदा व्यापक टीकाकरण सिफारिशों को कमजोर करता हो।
बच्चों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों की मुख्य चिंता यह है कि यदि जरूरी टीकों को टाल दिया गया या कम बच्चों तक पहुंचा, तो खसरा, काली खांसी, निमोनिया और अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियों के खिलाफ सामुदायिक सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
2026 में किए गए एक Harvard/de Beaumont सर्वे में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में कटौती का विरोध करने वालों में 88 प्रतिशत ने कहा कि इससे भविष्य में ज्यादा बच्चे बीमार पड़ सकते हैं। 86 प्रतिशत ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में वैक्सीन को महत्वपूर्ण माना।
MMR वैक्सीन विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
MMR वैक्सीन खसरा, मम्प्स और रूबेला से बचाव करती है। इसे अलग-अलग टीकों में बांटने की मांग के पीछे प्रशासन की सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त MMR वैक्सीन के खिलाफ कोई नया मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो मौजूदा नीति में इस तरह के बड़े बदलाव को उचित ठहराए।
सबसे बड़ा सवाल: विज्ञान या राजनीति?
अमेरिका में वैक्सीन नीति को लेकर विवाद अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा। एक तरफ ट्रंप प्रशासन टीकाकरण कार्यक्रम को बदलने को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बता रहा है, वहीं WHO और प्रमुख बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ संस्थाएं कह रही हैं कि वैज्ञानिक प्रमाणों में बदलाव हुए बिना नीति में इतनी बड़ी दिशा बदलना चिंता का विषय है।
निष्कर्ष: बच्चों का टीकाकरण कम करना या उसका समय बदलना सीधे तौर पर कोई साधारण प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसका असर बीमारी से बचाव, सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य के संक्रमणों पर पड़ सकता है। इसलिए WHO और विशेषज्ञों का जोर है कि अमेरिका की नई नीति का आधार राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि पारदर्शी और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण होना चाहिए।




