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UN में जयशंकर का पाकिस्तान को जवाब, बोले—आतंकवाद पर समझौता नहीं; भारत को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार

अंतरराष्ट्रीय/ कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | संयुक्त राष्ट्र | 27 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी कूटनीतिक बहस देखने को मिली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के जवाब में आतंकवाद को लेकर भारत का रुख बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में शांति के सामने आतंकवाद लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के प्रति अपने रुख में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतने की बात कही।

जयशंकर का यह बयान शहबाज शरीफ के UNGA संबोधन के एक दिन बाद आया। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव, कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया था। उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले की आलोचना की और कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

इसके जवाब में जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भारत की पुरानी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य स्थिति की तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता और जो देश सीमा पार आतंकवाद या आतंकवाद को प्रोत्साहन देने वाली गतिविधियों में शामिल होते हैं, उन्हें उसके परिणामों से बचने की छूट नहीं दी जा सकती। जयशंकर ने विशेष रूप से कहा कि जब आतंकवाद को किसी राज्य का समर्थन हासिल हो और उसका स्वरूप सीमा पार का हो, तब यह सिर्फ किसी एक देश की सुरक्षा का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाता है।

भारत के विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को आर्थिक मदद देने वाले नेटवर्क को उजागर करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है। उनका तर्क था कि केवल आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि उन वित्तीय और दूसरे नेटवर्क पर भी ध्यान देना होगा जो ऐसी गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करते हैं। भारत ने लंबे समय से UN के मंच पर आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है।

जयशंकर ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के सामने भारत अपनी सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है। उनका यह बयान 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, क्योंकि शहबाज शरीफ ने अपने UNGA भाषण में उस घटनाक्रम को पाकिस्तान के नजरिए से पेश किया था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप का भी उल्लेख किया था।

सिंधु जल संधि का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव का अहम हिस्सा बना हुआ है। शहबाज शरीफ ने UNGA में कहा कि पानी को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए और पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान गंभीरता से लेगा। भारत ने 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। पाकिस्तान ने UN में इस कदम की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया है, जबकि भारत अपनी सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में इस फैसले को रखता रहा है।

जयशंकर का संबोधन सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर बढ़ते दबाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री मार्गों पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं और तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा और व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत है। यह मुद्दा भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

विदेश मंत्री ने अपने भाषण में ग्लोबल साउथ के मुद्दों को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई विकासशील देश उन संघर्षों और आर्थिक संकटों का असर झेल रहे हैं जिनमें उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। जयशंकर ने भारत की मानवीय सहायता, दवाइयों, भोजन, ऊर्जा, उर्वरक और क्षमता निर्माण से जुड़ी पहलों का उल्लेख किया और अफ्रीका सहित ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत के सहयोग को रेखांकित किया। नेपाल में आई बाढ़ और दूसरे संकटों के दौरान भारत की सहायता का भी उन्होंने उल्लेख किया।

इस पूरे घटनाक्रम में UNGA का मंच भारत-पाकिस्तान के अलग-अलग कूटनीतिक नजरिए को सामने लाने का माध्यम बना। पाकिस्तान ने कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 के सैन्य टकराव को अपने पक्ष से उठाया, जबकि भारत ने आतंकवाद और आत्मरक्षा के अधिकार को अपने जवाब का केंद्र बनाया। दोनों देशों के बयानों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपने-अपने पक्ष को स्वीकार करने की अपील दिखाई दी, लेकिन इन दावों और उनके कानूनी तथा राजनीतिक आधार पर दोनों देशों की स्थिति एक-दूसरे से अलग है।

जयशंकर के UNGA भाषण से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आतंकवाद और सीमा पार हिंसा को सामान्य कूटनीतिक विवाद की तरह नहीं देखा जाएगा। वहीं पाकिस्तान ने पानी और कश्मीर जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर अपनी स्थिति रखने की कोशिश की। अब इस कूटनीतिक टकराव का अगला असर दोनों देशों के बीच बातचीत, क्षेत्रीय सुरक्षा और सिंधु जल संधि को लेकर आगे होने वाली गतिविधियों में दिखाई दे सकता है। फिलहाल UNGA के मंच से भारत का मुख्य संदेश स्पष्ट रहा—आतंकवाद के मुद्दे पर भारत अपने सुरक्षा हितों और आत्मरक्षा के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखेगा।

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