स्वास्थ्य/ व्यापार/ कृषि | ABC NATIONAL NEWS | हिमालय | 13 अगस्त 2026
हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में मिलने वाली बेहद दुर्लभ यार्सागुम्बा (Yarsagumba) दुनिया की सबसे महंगी प्राकृतिक जैविक वस्तुओं में गिनी जाती है। इसे चीन और तिब्बती पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है और इसकी कथित कामोत्तेजक क्षमता के कारण इसे आम बोलचाल में ‘Himalayan Viagra’ कहा जाता है। हालांकि इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर किए गए कई दावों के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित और मिश्रित हैं। इसकी बढ़ती कीमत और चीन में भारी मांग ने हिमालयी क्षेत्रों में इसके संग्रह को बेहद आकर्षक बना दिया है, लेकिन अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन इसके भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं।
कीड़ा और फंगस का अनोखा मेल
यार्सागुम्बा वास्तव में कोई सामान्य पौधा नहीं है। यह एक परजीवी फंगस और कीट के लार्वा का जटिल संयोजन है। वैज्ञानिक साहित्य में इसे Ophiocordyceps sinensis से जोड़ा जाता है। फंगस कैटरपिलर के शरीर को संक्रमित करता है और अंततः उसे नष्ट कर उसके सिर से डंठल जैसी संरचना बाहर निकलती है। गर्मियों में इसे जमीन से हाथ से खोजकर निकाला जाता है।

यह मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है और नेपाल, भूटान, तिब्बत तथा भारत के कुछ हिमालयी क्षेत्रों से जुड़ा है।
सोने से भी महंगी कीमत
इसकी दुर्लभता और चीन में भारी मांग ने इसे असाधारण रूप से महंगा बना दिया है। 2019 में ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ने चीनी सरकारी मीडिया के हवाले से इसकी कीमत लगभग 4 लाख युआन यानी करीब 83,800 डॉलर प्रति किलोग्राम तक बताई थी। 2017 की The Conversation रिपोर्ट में भी उच्च गुणवत्ता वाले यार्सागुम्बा की कीमत 1 लाख डॉलर प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का उल्लेख किया गया था।
कीमत इलाके, गुणवत्ता, आकार और उपलब्धता के अनुसार काफी बदल सकती है।
चीन में इतनी मांग क्यों?
चीन और तिब्बती पारंपरिक चिकित्सा में यार्सागुम्बा का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसके बारे में कामेच्छा बढ़ाने, यौन क्षमता सुधारने, थकान कम करने, किडनी और प्रजनन संबंधी समस्याओं में मदद करने जैसे दावे किए जाते हैं। कैंसर और मोटापे जैसे गंभीर रोगों के इलाज से जुड़े दावे भी किए गए हैं, लेकिन इन्हें स्थापित चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता।
यानी इसकी सबसे बड़ी ‘वैल्यू’ केवल औषधीय उपयोग नहीं, बल्कि दुर्लभता, पारंपरिक मान्यता और प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है।
क्या सच में ‘नेचुरल वियाग्रा’ है?
यहीं सबसे जरूरी सावधानी है। कुछ शोधों में यार्सागुम्बा के जैव सक्रिय घटकों और संभावित औषधीय प्रभावों पर अध्ययन हुआ है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि यह वियाग्रा की तरह प्रभावी या सुरक्षित उपचार है। इसलिए इसे यौन कमजोरी या किसी बीमारी की प्रमाणित दवा मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
स्थानीय लोगों के लिए कमाई का बड़ा साधन
यार्सागुम्बा हिमालयी इलाकों में रहने वाले कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मौसमी आय का स्रोत रहा है। रोजगार के सीमित अवसरों वाले ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लोग गर्मियों में कई सप्ताह पहाड़ों पर रहकर इसे तलाशते हैं।
यानी एक तरफ चीन की मांग ने इसकी कीमत बढ़ाई, तो दूसरी तरफ इसने दूरदराज के समुदायों के लिए रोजगार और नकद आय का अवसर भी पैदा किया।
लेकिन यही मांग बन रही है खतरा
समस्या यह है कि ज्यादा कीमत ने यार्सागुम्बा के अत्यधिक संग्रह को बढ़ावा दिया है। यदि फंगस को पूरी तरह विकसित होने से पहले निकाल लिया जाए तो उसके बीजाणुओं के प्राकृतिक प्रसार पर असर पड़ सकता है। The Conversation की रिपोर्ट ने 2009 के बाद व्यापार में गिरावट और लगातार बढ़ते ओवर-हार्वेस्टिंग की ओर भी ध्यान दिलाया था।
इसके अलावा ऊंचाई वाले हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में तापमान बढ़ना और बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव इसके प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकता है।
चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन यार्सागुम्बा का सबसे बड़ा और प्रभावशाली उपभोक्ता बाजार है। भारी मांग ने इसके लिए एक विशाल व्यापारिक श्रृंखला तैयार की है। यही कारण है कि यह केवल पारंपरिक औषधि नहीं रह गया, बल्कि हिमालयी अर्थव्यवस्था और चीन के प्रीमियम हर्बल बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि इसकी ऊंची कीमत ने इसे भ्रष्टाचार के मामलों से भी जोड़ा। 2019 में चीन के Qinghai प्रांत के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों ने सरकारी अधिकारियों द्वारा यार्सागुम्बा के जरिए कथित रिश्वत और निजी लाभ के खिलाफ अभियान चलाने की जानकारी दी थी।
यार्सागुम्बा के संभावित फायदे—क्या प्रमाण है?
पारंपरिक चीनी और तिब्बती चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल।
कुछ प्रयोगशाला और प्रारंभिक अध्ययनों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट जैसे संभावित जैविक प्रभावों पर शोध हुआ है।
पारंपरिक रूप से ऊर्जा, थकान और यौन स्वास्थ्य से जुड़े उपयोगों के लिए प्रसिद्ध।
हिमालयी ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मौसमी आय का स्रोत।
दुर्लभ प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार में उच्च मूल्य रखता है।
लेकिन: कैंसर, मोटापा, नपुंसकता या अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के दावों को प्रमाणित चिकित्सा उपचार के रूप में नहीं लेना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल—बाजार या संरक्षण?
यार्सागुम्बा की कहानी बताती है कि जब किसी दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन की मांग अचानक बहुत बढ़ती है तो वह स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक वरदान भी बन सकता है और उसी समय उसके अस्तित्व के लिए खतरा भी।
चीन की मांग कीमत बढ़ा रही है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध संग्रह यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि हिमालय की यह ‘जैविक दौलत’ आने वाली पीढ़ियों के लिए बचेगी भी या नहीं।




