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अमेरिका ने रूसी तेल पर ढील दी, लेकिन ईरान की हॉर्मुज नीति ने बढ़ाई टेंशन

एबीसी नेशनल न्यूज | वॉशिंगटन | 13 मार्च 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा राजनीति के बीच अमेरिका ने रूस के कच्चे तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल की आपूर्ति फिर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इससे वैश्विक तेल बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और कई देशों में महंगाई को कुछ राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाजार में रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ती है तो तेल की कीमतें कुछ हद तक स्थिर रह सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा से जुड़े खर्चों में कमी आने की संभावना भी बनती है, जिसका असर सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ता है।

अमेरिका के इस फैसले पर आर्थिक विश्लेषकों की नजर भी बनी हुई है। उनका मानना है कि ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर भी पड़ सकता है। यदि ऊर्जा कीमतें नियंत्रण में रहती हैं तो महंगाई को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इसी बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने नई चिंता खड़ी कर दी है। ईरान ने हाल ही में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि जब ईरान पर हमले होंगे तो जवाबी कार्रवाई की आशंका भी बनी रहती है और इसका असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े माने जाते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन वैश्विक बाजार में तेल की मांग और आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए समय-समय पर इन प्रतिबंधों में ढील देने की चर्चाएं भी होती रही हैं।

ऐसे में अब दुनिया की नजर दो बड़े कारकों पर टिकी है—एक तरफ रूसी तेल की बढ़ती आपूर्ति और दूसरी तरफ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की नीति। इन दोनों घटनाओं का आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।

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