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राज ठाकरे ने मोदी-अडानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री हटाई, मुंबई पुलिस कमिश्नर के अनुरोध के बाद लिया फैसला

सोशल मीडिया पर 48 लाख से ज्यादा व्यूज मिलने का दावा, शनिवार को MNS की एक शाखा में भी दिखाई गई थी फिल्म

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 25 अक्टूबर 2026

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया है। राज ठाकरे ने रविवार, 25 अक्टूबर को बताया कि उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर के अनुरोध के बाद यह कदम उठाया। यह डॉक्यूमेंट्री हॉटमेल के संस्थापक सबीर भाटिया ने बनाई है। राज ठाकरे के मुताबिक, इसका मकसद जनता को जानकारी देना था और सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किए जाने के बाद इसे 48 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था।

पुलिस कमिश्नर के अनुरोध पर हटाई फिल्म

राज ठाकरे ने बताया कि मुंबई पुलिस कमिश्नर ने उनसे डॉक्यूमेंट्री को सोशल मीडिया से हटाने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने फिल्म को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुलिस कमिश्नर ने डॉक्यूमेंट्री हटाने का अनुरोध किन वजहों से किया था। पुलिस की ओर से इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई, औपचारिक नोटिस या प्रतिबंध की जानकारी भी खबर में नहीं दी गई है।

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा पैदा कर दी है। डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी का जिक्र होने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। लेकिन फिल्म को हटाने के पीछे की वजहों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि अनुरोध किस परिस्थिति में किया गया।

एक्स पर 48 लाख से अधिक व्यूज का दावा

राज ठाकरे ने दावा किया कि डॉक्यूमेंट्री को एक्स पर 48 लाख से ज्यादा बार देखा गया था। उनके अनुसार, फिल्म को पोस्ट करने का उद्देश्य लोगों को जानकारी देना था। सोशल मीडिया पर किसी वीडियो या डॉक्यूमेंट्री को बड़ी संख्या में लोगों का देखना उसके व्यापक प्रसार को दर्शाता है, लेकिन केवल व्यूज की संख्या से उसमें दी गई जानकारी की सत्यता या विश्वसनीयता तय नहीं होती।

इस मामले में डॉक्यूमेंट्री की विषयवस्तु, उसमें पेश किए गए तथ्यों और दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध खबर में नहीं दिया गया है। इसलिए फिल्म में किए गए किसी भी दावे को जांच के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। साथ ही, इसे हटाने के निर्णय को लेकर भी राज ठाकरे के बयान से आगे विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

MNS नेताओं को भी फैसले से हैरानी

इस घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कुछ नेता भी डॉक्यूमेंट्री हटाए जाने से हैरान बताए गए हैं। इसकी वजह यह थी कि शनिवार को पार्टी की एक शाखा में भी इस फिल्म की स्क्रीनिंग की गई थी। यानी सोशल मीडिया से फिल्म हटाए जाने से ठीक पहले पार्टी से जुड़ी एक जगह पर इसे दिखाया गया था।

हालांकि, खबर में यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी के किन नेताओं ने इस फैसले पर हैरानी जताई या संगठन के भीतर इस मुद्दे पर कोई औपचारिक चर्चा हुई है या नहीं। यह भी सामने नहीं आया है कि पार्टी की शाखा में फिल्म दिखाने के संबंध में कोई अलग निर्देश जारी किया गया था।

राजनीतिक चर्चा के बीच कई सवाल

राज ठाकरे के इस कदम के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या डॉक्यूमेंट्री को हटाने का अनुरोध किसी संभावित विवाद को देखते हुए किया गया था? क्या पुलिस के पास फिल्म की सामग्री को लेकर कोई विशेष चिंता थी? और क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत या कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई है? उपलब्ध रिपोर्ट इन सवालों का जवाब नहीं देती।

यह मामला राजनीतिक सामग्री, सोशल मीडिया और पुलिस की भूमिका के बीच संबंधों पर भी ध्यान खींचता है। किसी फिल्म को हटाने का अनुरोध अपने आप में किसी प्रतिबंध या कानूनी उल्लंघन का प्रमाण नहीं है। इसके लिए अनुरोध के आधार, संबंधित सामग्री और पुलिस की आधिकारिक स्थिति की जानकारी जरूरी होगी।

फिलहाल, इतना स्पष्ट है कि राज ठाकरे ने मुंबई पुलिस कमिश्नर के अनुरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी है। राज ठाकरे ने फिल्म को 48 लाख से अधिक व्यूज मिलने का दावा किया है, जबकि MNS की एक शाखा में शनिवार को इसकी स्क्रीनिंग भी हुई थी। अब इस घटनाक्रम से जुड़े कारणों और पुलिस के अनुरोध की प्रकृति पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

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