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जामिया पुलिस छावनी में तब्दील! क्लासरूम के बाद अब छात्राओं के हॉस्टल पर भी ताला, मस्जिद में ITBP के जवान—VC-रजिस्ट्रार बर्खास्त करो!

छात्र संघ चुनाव की मांग पर 14 दिन से आमरण अनशन, क्लास ऑनलाइन, लाइब्रेरी बंद, गेटों पर पहरा, पुलिस से धक्का-मुक्की और छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिए जाने की खबर; छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

राष्ट्रीय/ शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 अक्टूबर 2026

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग अब विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गई है। छात्र 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, लेकिन चुनाव की तारीख घोषित करने के बजाय परिसर में बंदिशें बढ़ने, कक्षाएं ऑनलाइन करने, लाइब्रेरी बंद रखने और प्रवेश रोकने की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार को गेट नंबर 7 पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची तीन छात्राओं और एक युवक को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई, हालांकि पुलिस उपायुक्त ने हिरासत की बात से इनकार किया। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर मौके पर क्या हुआ और विद्यार्थियों को क्यों रोका गया।

जामिया में तालीम पर ताला, लोकतंत्र पर पहरा

जामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। छात्रों का कहना है कि 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए और वे लंबे समय से अपने प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से वंचित हैं। भूख हड़ताल के बीच प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन करने और अगले आदेश तक लाइब्रेरी बंद रखने का फैसला लिया। प्रशासन ने इसे छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई जारी रखने से जुड़ा कदम बताया है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों के बीच इसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब चुनाव की मांग का समाधान बातचीत से निकल सकता है, तो परिसर में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है जहां पढ़ाई, लाइब्रेरी और सामान्य आवाजाही प्रभावित हो रही है?

गेट नंबर 7 पर टकराव, छात्र-छात्राओं को हिरासत में लेने की खबर

रविवार को गेट नंबर 7 पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई। मीडिया रिपोर्टों में तीन छात्राओं और एक युवक को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई, जबकि पुलिस उपायुक्त ने इससे इनकार किया। हिरासत को लेकर सामने आए इन विरोधाभासी बयानों पर स्थिति साफ करना जरूरी है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन बताएं कि क्या किसी को हिरासत में लिया गया, यदि हां तो किस आधार पर और उन्हें कहां ले जाया गया। घटनास्थल की CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो। छात्र संघ चुनाव की मांग का जवाब टकराव और अस्पष्टता से नहीं दिया जा सकता।

गर्ल्स हॉस्टल के गेट पर ताला? छात्राओं की चिंता कौन सुनेगा

छात्राओं के हॉस्टल खाली कराने और गेट बंद किए जाने की सूचना ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि छात्राओं को हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया गया है, तो प्रशासन बताए कि इसकी वजह क्या है, उन्हें कितना समय दिया गया है और घर लौटने के लिए सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था कौन करेगा। ट्रेन की टिकट, यात्रा का खर्च और दूर-दराज से आने वाली छात्राओं की परिस्थितियों का क्या होगा? महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण की बात करने वाले संस्थान में छात्राओं की पढ़ाई, रहने और आने-जाने की सुविधा को संकट में नहीं छोड़ा जा सकता। प्रशासन तत्काल स्थिति स्पष्ट करे और किसी भी छात्रा को उचित व्यवस्था के बिना हॉस्टल छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए।

विश्वविद्यालय की मस्जिद में ITBP के जवान, प्रशासन जवाब दे

विश्वविद्यालय की मस्जिद में ITBP के जवानों की मौजूदगी की सूचना भी सामने आई है। प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां स्पष्ट करें कि जवानों की तैनाती किस आदेश के तहत हुई, इसका उद्देश्य क्या है और यह व्यवस्था कब तक रहेगी। विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत हो सकती है, लेकिन धार्मिक स्थल और शैक्षणिक वातावरण से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता जरूरी है। छात्रों, शिक्षकों और समुदाय की चिंताओं को नजरअंदाज करके भरोसा कायम नहीं किया जा सकता।

छात्राओं की गरिमा और बुनियादी सुविधाओं पर जवाबदेही तय हो

आंदोलन के दौरान छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और पुरुष टॉयलेट का इस्तेमाल करने की मजबूरी से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि किसी छात्रा को महिला शौचालय उपलब्ध न होने के कारण पुरुष टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़ा, तो यह बुनियादी सुविधाओं और गरिमा से जुड़ा गंभीर सवाल है। सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार को लेकर आई शिकायतों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। शिकायतों को दबाने या विद्यार्थियों को ही परेशान करने के बजाय प्रशासन सुविधाएं सुनिश्चित करे और जवाबदेही तय करे।

टेंट हटाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा

आंदोलनकारी छात्रों के टेंट हटाने, बिस्तर फेंकने और दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस फैसला लेने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि छात्रों के भीतर भय पैदा करना। कमेटी गठित करने और संवाद की कोशिशों के बावजूद जब अनशन जारी है, तो प्रशासन को अब निश्चित समयसीमा के साथ चुनाव की तारीख घोषित करनी चाहिए।

भारत-विरोधी नारों की निष्पक्ष जांच हो, आंदोलन को बदनाम न करो

परिसर में भारत-विरोधी नारे लिखे जाने की घटना की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। नारे किसने लिखे, कब लिखे और सुरक्षा व्यवस्था के बीच ऐसा कैसे हुआ—इन सवालों के जवाब सबूतों के आधार पर सामने आने चाहिए। जहां CCTV कैमरे खराब होने की बात सामने आई है, वहां तकनीकी जांच कराई जाए और उपलब्ध फुटेज सुरक्षित रखा जाए। दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी घटना के आधार पर पूरे छात्र आंदोलन को बदनाम करना या सभी प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

VC और रजिस्ट्रार की जवाबदेही तय हो, बर्खास्तगी पर फैसला हो

जामिया के कुलपति मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार महताब आलम रिज़वी के कार्यकाल में पैदा हुए इस गंभीर गतिरोध पर अब जवाबदेही तय होनी चाहिए। छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित न होना, लंबे समय से जारी अनशन, ऑनलाइन कक्षाएं, बंद लाइब्रेरी, प्रवेश को लेकर टकराव, हिरासत को लेकर विरोधाभासी बयान और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल—इन सबकी स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है।

सरकार और शिक्षा मंत्रालय तत्काल हस्तक्षेप करें। दो स्वतंत्र पर्यवेक्षक भेजे जाएं, छात्रों और शिक्षकों से सीधा संवाद हो और चुनाव की निश्चित समयसीमा तय की जाए। कुलपति और रजिस्ट्रार की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो। यदि उनकी गंभीर प्रशासनिक विफलता या जिम्मेदारी सामने आती है, तो उन्हें पद से हटाने और बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाए।

जामिया किसी अधिकारी की निजी जागीर नहीं है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना, लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छात्र संघ चुनाव की मांग को अनिश्चितकाल तक टालना और परिसर में बढ़ते तनाव का समाधान न निकालना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए। चुनाव की तारीख घोषित करो। छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करो। हिरासत के मामले में स्थिति स्पष्ट करो। मस्जिद में सुरक्षाबलों की तैनाती का कारण बताओ। परिसर की स्थिति सामान्य करो। VC और रजिस्ट्रार की जवाबदेही तय करो।

जामिया को पुलिस छावनी और भय के माहौल से निकालकर शिक्षा, संवाद और लोकतंत्र का केंद्र बनाओ।

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