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झारखंड में छात्रों पर कार्रवाई से बवाल, ABVP कार्यकर्ता हिरासत में

JPSC-JSSC परीक्षा में गड़बड़ियों और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में ABVP का विधानसभा मार्च; रांची में पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, BJP का राज्यव्यापी बंद और सरकार पर हमला

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 11 अगस्त 2026

परीक्षा विवाद से सड़क तक पहुंचा आंदोलन

झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब लगातार बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने रांची में पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा तक मार्च निकाला। यह प्रदर्शन एक दिन पहले JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया। पुलिस ने मार्च के दौरान कई ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। आंदोलन कर रहे छात्र भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।

सोमवार की कार्रवाई के बाद बढ़ा गुस्सा

रांची में सोमवार 10 अगस्त को JPSC और JSSC अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई। पुलिस कार्रवाई में कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इसी कार्रवाई के बाद मंगलवार को ABVP ने विरोध मार्च का ऐलान किया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और मार्च को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया।

ABVP का सवाल—छात्रों की आवाज क्यों दबाई जा रही?

ABVP का कहना है कि जिन युवाओं का भविष्य भर्ती परीक्षाओं पर टिका है, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। संगठन ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगना छात्रों का अधिकार है। मंगलवार को ABVP कार्यकर्ताओं ने पुरानी विधानसभा क्षेत्र से नई विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की मांगों को स्वीकार करने के नारे लगाए गए।

छात्रों की मुख्य मांग क्या है?

झारखंड में यह आंदोलन मुख्य रूप से JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी JSSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कथित परीक्षा अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग भी उठाई जा रही है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा वर्षों का समय, पैसा और मेहनत लगाते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी जांच कराकर भरोसा बहाल करे।

आंदोलन को 18 दिन, राजनीतिक समर्थन बढ़ा

छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई से जारी है और मंगलवार को यह 18वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन के बढ़ने के साथ अब राजनीतिक दल भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। BJP ने सोमवार की पुलिस कार्रवाई को छात्रों के खिलाफ ज्यादती बताया और मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। BJP नेताओं ने सरकार पर छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी मांग की कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

BJP का कांग्रेस पर भी हमला

झारखंड में JMM-कांग्रेस गठबंधन सरकार को लेकर BJP ने कांग्रेस को भी घेरा है। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और BJP नेता बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि अगर वह छात्रों के साथ है तो सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम क्यों नहीं उठाती। BJP ने राहुल गांधी से भी छात्रों के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने और राज्य सरकार पर दबाव बनाने की मांग की है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में विपक्ष के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई और कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

राहुल गांधी ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के खिलाफ हिंसा को गलत बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के खिलाफ हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। राहुल का बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड का छात्र आंदोलन राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि BJP इसे राज्य सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रही है।

केजरीवाल का समर्थन, सरकार से समाधान की अपील

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने छात्रों की मांगों को हल करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। इससे साफ है कि झारखंड का भर्ती परीक्षा विवाद अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से उठा रहे हैं और छात्रों की नाराजगी को सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश भी दिखाई दे रही है।

अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री

सोमवार की कार्रवाई के बाद घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों को रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी अस्पताल पहुंचे और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत दूसरे युवाओं से मुलाकात की। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार महतो लंबे समय से भूख हड़ताल पर थे और प्रदर्शन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। CJP ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और छात्र नेता के प्रति समर्थन जताया। हालांकि पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम के अलग-अलग दावों की स्वतंत्र जांच का सवाल अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

विधानसभा में भी गरमाया मामला

मंगलवार को झारखंड विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा उठ गया। BJP विधायक सदन के वेल में पहुंचकर विरोध करने लगे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके कारण विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी। सत्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान BJP समर्थित लोगों ने हिंसा की। इस तरह सड़क पर छात्रों का आंदोलन अब विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है।

अब सरकार के सामने जवाब देने की चुनौती

झारखंड सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह छात्रों की शिकायतों को केवल कानून-व्यवस्था के सवाल के रूप में न देखे, बल्कि भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दे। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी केवल एक रोजगार नहीं, बल्कि परिवार और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का बड़ा सहारा होती है। इसलिए परीक्षा में कथित अनियमितता का आरोप सामने आने पर पारदर्शी जांच, समयबद्ध कार्रवाई और दोषियों की जवाबदेही जरूरी है। साथ ही प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग हुआ है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे जरूरी

झारखंड का मौजूदा विवाद केवल एक परीक्षा या एक दिन के प्रदर्शन का मामला नहीं रह गया है। यह उन हजारों युवाओं की चिंता से जुड़ गया है जो सरकारी नौकरी की तैयारी में अपने जीवन के कई साल लगा रहे हैं। सरकार यदि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और छात्रों से सीधा संवाद करने की पहल करती है तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि आंदोलन का जवाब केवल पुलिस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से दिया गया, तो यह विवाद और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल रांची की सड़कों से लेकर विधानसभा तक एक ही सवाल गूंज रहा है—युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब आखिर कब मिलेगा?

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