राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नेताजी के अवशेषों का मामला
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन और उनके अंतिम अवशेषों को लेकर दशकों से चली आ रही चर्चा अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखे उनके बताए जा रहे अवशेषों को भारत वापस लाने की मांग की है। मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से जवाब मांगा। अदालत का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब चार महीने पहले नेताजी के परिजन की ओर से दायर इसी तरह की एक याचिका पर अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया था।
बेटी की मांग—अब भारत लौटें नेताजी के अवशेष
अनिता बोस फाफ की याचिका का मूल सवाल यही है कि यदि टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखे अवशेष नेताजी सुभाष चंद्र बोस के हैं, तो उन्हें भारत लाकर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार और राष्ट्रीय सम्मान दिया जाना चाहिए। नेताजी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के उन सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना और आजाद हिंद फौज के माध्यम से स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा दी। इसलिए उनके अंतिम अवशेषों से जुड़ा सवाल केवल एक परिवार की भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय स्मृति से भी जुड़ा विषय है।
1945 में विमान हादसे के बाद क्या हुआ था?
नेताजी की मृत्यु को लेकर आधिकारिक तौर पर लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया से आगे की यात्रा के दौरान उनका विमान ताइहोकू, जिसे आज ताइपेई कहा जाता है, में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इस दुर्घटना में उनकी मौत होने की बात सामने आई। इसके बाद उनके पार्थिव अवशेषों को सितंबर 1945 की शुरुआत में टोक्यो ले जाया गया और बाद में उन्हें रेंकोजी मंदिर में रखा गया। हालांकि नेताजी की मृत्यु की परिस्थितियों और उनके अवशेषों की पहचान को लेकर भारत में दशकों तक सवाल उठते रहे हैं और अलग-अलग स्तर पर जांच भी होती रही है।
रेंकोजी मंदिर से भारत तक पहुंचा मामला
टोक्यो का रेंकोजी मंदिर लंबे समय से नेताजी से जुड़े अवशेषों का प्रमुख स्थान माना जाता है। भारत में कई लोग चाहते रहे हैं कि नेताजी के अवशेष भारत लाए जाएं और उन्हें देश की धरती पर अंतिम सम्मान दिया जाए। दूसरी ओर, नेताजी की मृत्यु और अवशेषों की पहचान को लेकर मौजूद ऐतिहासिक विवादों के कारण यह मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। अब उनकी बेटी की याचिका ने इस पूरे विषय को फिर कानूनी और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से जवाब मांगना इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चार महीने पहले भी पहुंचा था मामला
यह पहली बार नहीं है जब नेताजी के अवशेष भारत लाने की मांग अदालत के सामने आई है। करीब चार महीने पहले नेताजी के ग्रैंड-नेफ्यू आशीष रे ने भी इसी तरह की याचिका दायर की थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। अब उनकी बेटी अनिता बोस फाफ की ओर से दायर नई याचिका पर अदालत ने केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों से जवाब मांगा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अदालत सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले को आगे देखने के लिए तैयार है।
अब केंद्र सरकार के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार के जवाब पर हैं। विदेश मंत्रालय को जापान से जुड़े कूटनीतिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर अपना पक्ष रखना होगा, जबकि गृह मंत्रालय इस मामले से जुड़े भारत सरकार के रिकॉर्ड और पूर्व की जांचों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। नेताजी से जुड़े विभिन्न आयोगों और जांच प्रक्रियाओं में उनकी मृत्यु तथा अवशेषों को लेकर अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया जा चुका है। ऐसे में सरकार का जवाब केवल अवशेष भारत लाने के सवाल तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे जुड़े ऐतिहासिक और आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नेताजी आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा
सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में असाधारण साहस और राष्ट्रभक्ति के साथ लिया जाता है। उनका प्रसिद्ध संदेश “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” आज भी देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में गूंजता है। उन्होंने आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज के माध्यम से ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। यही कारण है कि उनके जीवन और मृत्यु से जुड़ा कोई भी सवाल देश में गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करता है। नेताजी के अंतिम अवशेषों को भारत लाने की मांग भी इसी भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव का हिस्सा है।
अब इतिहास और कानून के बीच अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस इस बात का अंतिम फैसला नहीं है कि रेंकोजी मंदिर में रखे अवशेष नेताजी के ही हैं या उन्हें भारत लाया जाएगा। फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार से उसका पक्ष मांगा है। आगे की सुनवाई में सरकार के रिकॉर्ड, ऐतिहासिक जांच और अन्य संबंधित तथ्यों पर चर्चा हो सकती है। लेकिन इतना तय है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम अवशेषों का सवाल एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या जवाब देती है और सुप्रीम कोर्ट इस ऐतिहासिक मामले को आगे किस दिशा में ले जाता है।




