अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बोगोटा | 11 अगस्त 2026
कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचा दी है। सोमवार को आए इस भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम 111 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या और बढ़ने की जानकारी सामने आई है। सबसे बड़ी चिंता 2,700 से ज्यादा लोगों के लापता होने की है। करीब 1,600 इमारतों के क्षतिग्रस्त होने या ढहने की सूचना है। बड़ी संख्या में लोग अब भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। सैनिक, बचावकर्मी, प्रशिक्षित खोज दल और आम नागरिक मिलकर मलबे के बीच जिंदगी तलाश रहे हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप का केंद्र सैन जोसे डेल पालमार के पास करीब 107 किलोमीटर की गहराई में था।
काली से पेरेइरा तक तबाही का मंजर
भूकंप का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी कोलंबिया के कई शहरों और कस्बों में देखने को मिला है। काली, पेरेइरा, क्विब्डो और मनिजालेस जैसे इलाकों से इमारतों के ढहने, दीवारों में बड़ी दरारें पड़ने और सड़कों पर मलबा जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। कई जगहों पर मकान और दूसरी इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुछ इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर खुले स्थानों पर जमा हो गए हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है, खासकर उन दूरदराज के इलाकों में जहां भूकंप के बाद संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है।
2,700 से ज्यादा लोग लापता, परिवारों की बढ़ी चिंता
इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना है। रिपोर्टों के मुताबिक 2,700 से ज्यादा लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि यह आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा सकता, क्योंकि आपदा के बाद कई लोगों का अपने परिवारों से संपर्क टूट जाता है और प्रभावित इलाकों से सूचनाएं देर से पहुंचती हैं। इसके बावजूद यह संख्या बताती है कि राहत और बचाव अभियान कितना बड़ा है। परिवार मलबे के पास खड़े होकर अपने लोगों के बाहर निकलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए नागरिक समूह और ऑनलाइन माध्यम भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश
बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचना है। कई जगहों पर भारी कंक्रीट के टुकड़े और लोहे की संरचनाएं रास्ता रोक रही हैं। सैनिकों और बचावकर्मियों के साथ स्थानीय लोग भी हाथों से मलबा हटाने में जुटे हैं। कहीं लोग कतार बनाकर मलबे के टुकड़े एक-दूसरे तक पहुंचा रहे हैं तो कहीं बचाव दल आवाज सुनकर संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे अभियानों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसलिए प्रशासन ने खोज और बचाव को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी है।
भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई मुश्किल
मुख्य भूकंप के बाद आने वाले झटकों ने बचाव अभियान को और कठिन बना दिया है। क्षतिग्रस्त इमारतों में दोबारा प्रवेश करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि कमजोर ढांचे अचानक गिर सकते हैं। बचावकर्मियों को एक तरफ मलबे में फंसे लोगों को जल्द निकालना है और दूसरी तरफ अपनी टीम तथा जीवित बचे लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। कई स्थानों पर लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है। लगातार झटकों के कारण राहत और नुकसान के आकलन का काम भी प्रभावित हो सकता है।
अस्पताल और स्कूल भी प्रभावित
भूकंप ने केवल घरों को नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। अस्पतालों और स्कूलों सहित कई इमारतों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे समय में अस्पतालों पर दबाव और बढ़ जाता है, क्योंकि बड़ी संख्या में घायलों को तत्काल उपचार की जरूरत होती है। जिन स्वास्थ्य केंद्रों को खुद नुकसान पहुंचा है, उनके लिए मरीजों का इलाज जारी रखना अलग चुनौती बन जाता है। स्कूलों को भी सुरक्षा जांच तक बंद रखना पड़ सकता है।
सड़कों और हवाई संपर्क पर भी असर
भूकंप से परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर सामान्य उड़ानों को रोकना या सीमित करना पड़ा है, जबकि कुछ स्थानों पर उन्हें चिकित्सा और सरकारी उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका सीधा असर राहत सामग्री, मेडिकल टीम और बचाव उपकरणों की आवाजाही पर पड़ता है। दूरदराज के इलाकों में सड़क संपर्क कमजोर होने से वहां मदद पहुंचाना और मुश्किल हो सकता है। इसलिए सरकार को हवाई और सड़क दोनों माध्यमों से राहत व्यवस्था को मजबूत करना पड़ रहा है।
कोलंबिया सरकार ने आपातकालीन व्यवस्था तेज की
भूकंप के बाद सरकार ने आपातकालीन प्रतिक्रिया को तेज किया है। राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रीएला ने प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी संसाधनों को लगाने और राहत अभियान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सेना और बचाव दलों को प्रभावित इलाकों में लगाया गया है। सरकार के सामने तत्काल चुनौती लोगों की जान बचाने के साथ-साथ बेघर हुए परिवारों को सुरक्षित स्थान, भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है।
आम लोग बने राहत अभियान की बड़ी ताकत
इस भीषण आपदा के बीच कोलंबिया के आम लोगों की एकजुटता भी दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर नागरिक खुद मलबा हटाने और घायलों की मदद करने में जुटे हैं। जिनके अपने घर सुरक्षित हैं, वे दूसरों के लिए पानी, भोजन और जरूरी सामान जुटा रहे हैं। कई लोग बचाव दलों के साथ मिलकर मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। किसी भी बड़ी आपदा में सरकारी मशीनरी जरूरी होती है, लेकिन स्थानीय लोगों की यह भागीदारी राहत अभियान को जमीन पर तेजी देने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।
भूकंप ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए
कोलंबिया भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्र में स्थित है और देश पहले भी बड़े भूकंपों का सामना कर चुका है। इस घटना ने फिर सवाल खड़ा किया है कि पुराने और कमजोर भवनों को कितना सुरक्षित बनाया गया है। बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और गरीब इलाकों में भूकंपरोधी निर्माण, पुराने भवनों की जांच और आपातकालीन प्रशिक्षण पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी होगा। प्राकृतिक आपदा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर तैयारी से जान-माल का नुकसान काफी कम किया जा सकता है।
नुकसान का पूरा आंकड़ा आने में लगेगा समय
अभी सामने आए आंकड़ों को अंतिम नहीं माना जा सकता। कई इलाकों में बचाव अभियान जारी है और कुछ स्थानों से पूरी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। जैसे-जैसे मलबा हटेगा, अस्पतालों से आंकड़े आएंगे और दूरदराज के इलाकों से संपर्क बहाल होगा, मृतकों, घायलों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या सामने आएगी। यही वजह है कि फिलहाल हर नए आंकड़े को सावधानी से देखना जरूरी है।
अब हर मिनट कीमती है
कोलंबिया इस समय एक ऐसी त्रासदी से गुजर रहा है जिसमें हर गुजरता मिनट महत्वपूर्ण है। मलबे के नीचे दबे लोगों के लिए बचाव दलों की हर कोशिश जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई है। परिवार अपने प्रियजनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं और पूरा देश राहत अभियान पर नजर रखे हुए है। 7.4 तीव्रता के इस महाभूकंप ने कोलंबिया को गहरा जख्म दिया है, लेकिन मलबे के बीच चल रही जिंदगी की तलाश अब भी उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनी हुई है।




