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दिल्ली मेट्रो के स्टाफ क्वार्टर में आग से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

सुमन कुमार | नई दिल्ली 6 जनवरी 2026

राजधानी दिल्ली में मंगलवार सुबह दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के स्टाफ क्वार्टर में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों—पति, पत्नी और उनकी 10 वर्षीय मासूम बेटी—की जिंदा जलकर मौत हो गई। यह घटना उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में स्थित मेट्रो स्टाफ क्वार्टर की है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। आग इतनी तेज थी कि परिवार को संभलने या बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। प्रत्यक्षदर्शियों और दमकल विभाग के अनुसार, आग लगने की सूचना मंगलवार सुबह करीब 2:39 बजे मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग पांचवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट में लगी थी और कुछ ही देर में पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब फ्लैट के अंदर प्रवेश किया गया, तो तीनों के शव बुरी तरह झुलसी हालत में मिले।

मृतकों की पहचान 42 वर्षीय अजय, उनकी 38 वर्षीय पत्नी नीलम और 10 साल की बेटी जाह्नवी के रूप में हुई है। अजय दिल्ली मेट्रो में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और परिवार लंबे समय से इसी स्टाफ क्वार्टर में रह रहा था। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार बेहद शांत और मिलनसार था। देर रात आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर आसपास के लोग बाहर निकल आए, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर फंसे परिवार को कोई बचा नहीं सका।

प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है, हालांकि पुलिस और दमकल विभाग ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के सही कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इमारत में फायर सेफ्टी के इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं।

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा है कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जांच में हर संभव सहयोग करेगी। यह हादसा एक बार फिर शहरी आवासीय परिसरों में अग्नि सुरक्षा, इलेक्ट्रिक उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल और आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक खुशहाल परिवार का इस तरह खत्म हो जाना न सिर्फ सिस्टम की चूक पर सोचने को मजबूर करता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे पूरे जीवन को राख में बदल सकती है।

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