राष्ट्रीय | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 मई 2026
दिल्ली के आदर्श नगर इलाके से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 20 वर्षीय NEET छात्रा अपने घर में मृत पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने आत्महत्या की आशंका जताई है। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब परिवार कथित तौर पर बिना पुलिस को सूचना दिए शव का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पहुंच गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रुकवाकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मृतका की पहचान अंशिका पांडे के रूप में हुई है, जो उत्तर पश्चिम दिल्ली के लाल बाग, आजादपुर इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी और पिछले कई वर्षों से NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि छात्रा हाल के दिनों में काफी तनाव में थी। परिवार के कुछ सदस्यों ने दावा किया है कि NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद के बाद वह मानसिक दबाव में आ गई थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और कहा है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब आदर्श नगर थाने को PCR कॉल के जरिए सूचना मिली कि केवल पार्क श्मशान घाट में एक युवती का अंतिम संस्कार बिना पुलिस सूचना और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए किया जा रहा है। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और परिस्थितियों को संदिग्ध मानते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया। अधिकारियों ने शव को कब्जे में लेकर बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल की मॉर्चरी भेजा, जहां पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने छात्रा के घर का भी निरीक्षण किया है।
मामले में सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि परिवार ने कथित तौर पर पुलिस को बिना जानकारी दिए अंतिम संस्कार करने की कोशिश क्यों की। पुलिस सूत्रों के अनुसार जब अधिकारियों ने मेडिकल दस्तावेज और मृत्यु से जुड़े कागजात मांगे, तो परिवार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। श्मशान घाट के पुजारी को भी स्थिति संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या परिवार कानूनी प्रक्रिया से अनजान था या फिर इसके पीछे कोई और वजह थी।
परिवार और रिश्तेदारों का कहना है कि अंशिका पढ़ाई में बेहद तेज थी और उसे इस साल अच्छे रैंक की उम्मीद थी। उसके मामा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि NEET परीक्षा रद्द होने की खबर ने उसे गहरा मानसिक झटका दिया था। उनका कहना है कि छात्रा लगातार इसी बात को लेकर परेशान थी कि उसकी मेहनत और भविष्य दोनों अधर में लटक गए हैं। हालांकि पुलिस को अब तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए जांच एजेंसियां केवल पारिवारिक दावों के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बच रही हैं।
इस घटना ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, पेपर लीक विवाद और छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर बहस छेड़ दी है। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने पहले ही देशभर में लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच गुस्सा और असुरक्षा पैदा कर दी है। परीक्षा रद्द होने के बाद दिल्ली समेत कई शहरों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए और NTA की भूमिका पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं अब केवल शैक्षणिक चुनौती नहीं रह गई हैं, बल्कि वे मानसिक और सामाजिक दबाव का भी बड़ा कारण बनती जा रही हैं। लाखों छात्र कई-कई साल तक तैयारी करते हैं, परिवार आर्थिक और भावनात्मक निवेश करता है, और ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं छात्रों को गहरे मानसिक संकट में धकेल सकती हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह मांग कर रहे हैं कि शिक्षा व्यवस्था में काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता को अनिवार्य बनाया जाए।
दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी। लेकिन इस घटना ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की परीक्षा प्रणाली छात्रों को अवसर दे रही है या उन्हें असहनीय मानसिक दबाव की ओर धकेल रही है।



