बिजनेस/अर्थव्यवस्था | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 मई 2026
कीमती धातुओं पर बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा दबाव के बीच केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर बड़ा कदम उठाते हुए नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। सरकार ने शनिवार को चांदी के आयात को “रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी” में डाल दिया, जिसके बाद अब चांदी का आयात केवल सरकारी लाइसेंस के जरिए ही किया जा सकेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही केंद्र ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक यह नई नीति सामान्य चांदी के साथ-साथ सोने और प्लैटिनम की परत चढ़ी चांदी (Silver plated with gold and platinum) पर भी लागू होगी। “रिस्ट्रिक्टेड” श्रेणी में आने वाले उत्पादों का आयात पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं होता, लेकिन इसके लिए सरकार से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करने और कीमती धातुओं की अनियंत्रित खरीद पर लगाम लगाने की रणनीति का हिस्सा है। पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक अनिश्चितता और तेल कीमतों में उछाल के बीच भारत का आयात दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ कम करने की कोशिश कर रही है।
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की मांग में तेजी देखी गई है। निवेशक वैश्विक अस्थिरता के दौर में कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं। इसके चलते भारत में भी चांदी के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। सरकार को आशंका है कि अत्यधिक आयात चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आयात प्रतिबंध और बढ़ी हुई ड्यूटी का असर घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। आने वाले दिनों में ज्वेलरी उद्योग, सिल्वरवेयर कारोबार और औद्योगिक उपयोग वाली कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और EV बैटरी सेक्टर में भी चांदी का इस्तेमाल बढ़ रहा है, इसलिए उद्योग जगत सरकार के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए है।
सरकार का मानना है कि यह कदम घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। हालांकि कारोबारियों का एक वर्ग मानता है कि अत्यधिक प्रतिबंध से स्मगलिंग और अनौपचारिक व्यापार को बढ़ावा मिलने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक केंद्र सरकार फिलहाल “आर्थिक सतर्कता मोड” में दिखाई दे रही है। पेट्रोलियम आयात, कीमती धातुओं की बढ़ती खरीद और वैश्विक भू-राजनीतिक संकट के बीच सरकार आयात नियंत्रण, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की संयुक्त रणनीति पर काम कर रही है।




