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विश्व हाईपरटेंशन डे 2026 : “साइलेंट किलर” बनता हाई ब्लड प्रेशर, WHO ने नियमित जांच पर दिया जोर

स्वास्थ्य | पलक राज | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026

हर साल 17 मई को मनाया जाने वाला विश्व हाईपरटेंशन डे इस बार दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी के साथ मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वर्ल्ड हाईपरटेंशन लीग (WHL) ने 2026 की थीम रखी है —

“Controlling Hypertension Together: Check your blood pressure regularly, defeat the silent killer”

यानी “मिलकर हाईपरटेंशन को नियंत्रित करें : नियमित ब्लड प्रेशर जांच कर इस साइलेंट किलर को हराएं।”

विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। खराब लाइफस्टाइल, तनाव, फास्ट फूड, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में गिरावट के कारण भारत समेत दुनिया भर में युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।

WHO के अनुसार दुनिया भर में लगभग 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं, लेकिन उनमें से केवल हर 4 में 1 व्यक्ति का ब्लड प्रेशर सही तरीके से नियंत्रित है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

भारत में भी हाईपरटेंशन तेजी से बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित कई मेडिकल कॉन्फ्रेंस और स्वास्थ्य संगठनों की बैठकों में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि युवाओं में हाई बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक नमक वाला भोजन, जंक फूड, धूम्रपान, शराब, मानसिक तनाव और लगातार बैठकर काम करने की आदतें इसके सबसे बड़े कारण बन रहे हैं।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर की सबसे खतरनाक बात यह है कि कई बार मरीज को लंबे समय तक कोई लक्षण महसूस ही नहीं होते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर उसका हृदय, मस्तिष्क और किडनी प्रभावित होते रहते हैं। यही वजह है कि WHO इस बार नियमित ब्लड प्रेशर जांच पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार सामान्य ब्लड प्रेशर लगभग
120/80\ \mathrm{mmHg}
के आसपास माना जाता है। यदि लगातार इससे अधिक रीडिंग आती है, तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत होती है।

विशेषज्ञों ने हाईपरटेंशन से बचाव और नियंत्रण के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय भी सुझाए हैं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना सबसे जरूरी माना गया है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में हृदय रोग या हाई बीपी का इतिहास रहा हो। इसके अलावा भोजन में नमक की मात्रा कम करना, प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना, नियमित व्यायाम करना और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाना बेहद जरूरी बताया गया है।

WHO और स्वास्थ्य संगठनों ने यह भी कहा है कि पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अब केवल जीवनशैली का हिस्सा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

विश्व हाईपरटेंशन डे के अवसर पर दुनिया भर में जागरूकता अभियान, हेल्थ चेकअप कैंप और स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारत में भी कई अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे “साइलेंट किलर” को नजरअंदाज न करें और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी आदत बनाएं।

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स्पष्ट है कि हाईपरटेंशन अब केवल एक मेडिकल समस्या नहीं, बल्कि तेजी से उभरता वैश्विक जनस्वास्थ्य संकट बन चुका है। ऐसे में समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली ही इस “साइलेंट किलर” के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है।

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