अंतरराष्ट्रीय/टेक विशेष | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | मोबनी मजूमदार | 17 मई 2026
17 मई… यानी “वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन सोसायटी डे”। यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय दिवस नहीं, बल्कि उस डिजिटल क्रांति का प्रतीक है जिसने पूरी दुनिया की सोच, काम करने के तरीके और जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। आज मोबाइल फोन, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी नेटवर्क, डिजिटल पेमेंट्स और सोशल मीडिया केवल तकनीकी साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक समाज की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और यहां तक कि सरकारों की कार्यप्रणाली भी अब तेजी से डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर होती जा रही है। यही वजह है कि हर साल 17 मई को दुनिया सूचना और संचार तकनीक की ताकत और उसके प्रभाव को याद करती है।
इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1865 से जुड़ी हुई है, जब इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन यानी आईटीयू की स्थापना की गई थी। उस समय दुनिया में संचार के साधन बेहद सीमित थे और देशों के बीच संपर्क स्थापित करना एक बड़ी चुनौती माना जाता था। आईटीयू का उद्देश्य वैश्विक संचार व्यवस्था को मजबूत करना और तकनीकी सहयोग के जरिए दुनिया को जोड़ना था। बाद में इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के बाद इस दिन को “वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन सोसायटी डे” के रूप में मनाया जाने लगा, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि सूचना और संचार तकनीक केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी है।
आज डिजिटल तकनीक ने इंसानी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि बैंक, स्कूल, ऑफिस, अस्पताल और मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। इंटरनेट ने दुनिया को एक क्लिक की दूरी पर ला दिया है। ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, टेलीमेडिसिन, डिजिटल बैंकिंग और ई-कॉमर्स जैसी सुविधाओं ने यह साबित कर दिया कि तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि विकास की रीढ़ बन चुकी है। कोविड महामारी के दौरान दुनिया ने सबसे ज्यादा महसूस किया कि अगर डिजिटल तकनीक और इंटरनेट नेटवर्क न होते, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी व्यवस्थाएं लगभग ठप पड़ सकती थीं।
भारत के लिए भी यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में देश ने डिजिटल क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखा है। “डिजिटल इंडिया” अभियान ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से डिजिटल होते देशों में शामिल कर दिया है। गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाने, आधार आधारित डिजिटल पहचान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने करोड़ों लोगों की जिंदगी आसान बनाई है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क वाले देशों में गिना जाता है। यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक अब डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं।
5जी तकनीक ने भी भारत के डिजिटल भविष्य को नई गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 5जी केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हेल्थकेयर, कृषि, स्मार्ट सिटी, ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्री सेक्टर में भी बड़ा बदलाव लाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें प्रशासन, शिक्षा और कारोबार की दुनिया को भी तेजी से प्रभावित कर रही हैं। भारत सरकार का लक्ष्य है कि देश केवल डिजिटल उपभोक्ता न रहे, बल्कि टेक्नोलॉजी निर्माण और डिजिटल इनोवेशन का वैश्विक केंद्र भी बने।
हालांकि डिजिटल दुनिया के इस विस्तार के साथ चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। साइबर क्राइम, डेटा चोरी, ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग और फेक न्यूज आज पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक जितनी ताकतवर होती जा रही है, उतनी ही जरूरी डिजिटल सुरक्षा और डेटा संरक्षण भी हो गया है। कई देशों में सोशल मीडिया के जरिए गलत सूचना फैलाने, साइबर जासूसी और चुनावों को प्रभावित करने जैसे मामलों ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि अब “डिजिटल अधिकार” और “डिजिटल सुरक्षा” वैश्विक बहस का महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं।
भारत में भी डिजिटल असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। महानगरों और बड़े शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइस आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में अभी भी इंटरनेट पहुंच और डिजिटल साक्षरता सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, तो इंटरनेट पहुंच, साइबर जागरूकता और तकनीकी शिक्षा पर और अधिक काम करने की जरूरत होगी।
स्पष्ट है कि 17 मई केवल तकनीक का उत्सव नहीं है, बल्कि उस बदलती दुनिया का प्रतीक है जहां डिजिटल संचार इंसानियत को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। आज इंटरनेट और सूचना तकनीक ने दुनिया को पहले से कहीं ज्यादा करीब ला दिया है। आने वाले समय में यह तकनीकी क्रांति और तेज होगी, और वही देश सबसे आगे होंगे जो डिजिटल विकास के साथ डिजिटल सुरक्षा और समान अवसरों का संतुलन बनाए रखने में सफल होंगे।




