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AAP में फिर बड़ी टूट! MCD में 13 पार्षद अलग, ‘इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी’ बनाकर बढ़ाई केजरीवाल की मुश्किलें

राजनीतिक | काव्या अग्रवाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026

राघव चड्ढा के बाद अब MCD में झटका, दिल्ली की सियासत में नए ‘तीसरे मोर्चे’ की एंट्री

दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। लोकसभा चुनाव और संगठनात्मक खींचतान के बीच अब दिल्ली नगर निगम यानी MCD में भी पार्टी को बड़ी टूट का सामना करना पड़ा है। AAP के 13 पार्षदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर नई राजनीतिक पार्टी — “इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी” — के गठन का ऐलान कर दिया है। इस घटनाक्रम ने अरविंद केजरीवाल और AAP नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सबसे खास बात यह है कि इस बगावत की अगुवाई MCD में AAP के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता सदन रहे मुकेश गोयल कर रहे हैं। उनके साथ कई प्रभावशाली पार्षद — जिनमें हेमचंद गोयल, दिनेश भारद्वाज और हिमानी जैन जैसे नाम शामिल हैं — भी नए गुट में चले गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे AAP के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ रही थी। कई पार्षदों का आरोप था कि स्थानीय विकास कार्य ठप पड़े हैं और शीर्ष नेतृत्व जमीनी मुद्दों से कट चुका है। बागी नेताओं का कहना है कि MCD में जनता से जुड़े कामों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही थी और पार्षदों की बात सुनी नहीं जा रही थी। इसी असंतोष ने आखिरकार नई पार्टी के गठन का रास्ता खोल दिया।

दिल्ली MCD की 250 सदस्यीय हाउस में इस टूट के बाद AAP की ताकत घटकर लगभग 100 पार्षदों तक पहुंच गई है। ऐसे में नगर निगम की समितियों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम दिल्ली नगर निगम की सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।

AAP ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि बीजेपी ने सुनियोजित तरीके से पार्षदों को तोड़ने की कोशिश की ताकि नगर निगम में अपना प्रभाव बढ़ाया जा सके। AAP नेताओं का कहना है कि यह “ऑपरेशन लोटस” का नया संस्करण है, जिसके जरिए विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों पर अब तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दिलचस्प बात यह है कि नई बनी “इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी” खुद को फिलहाल “स्थानीय विकास और नगर निगम की राजनीति” तक सीमित रखने की बात कर रही है। बागी नेताओं का कहना है कि उनका फोकस केवल वार्ड स्तर के विकास, सफाई, पानी, सड़क और नागरिक सुविधाओं पर रहेगा। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में यह नया दल दिल्ली की बड़ी राजनीति में भी भूमिका निभाने की कोशिश कर सकता है।

दिल्ली की राजनीति में इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से AAP के भीतर असंतोष और नेतृत्व को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। राघव चड्ढा को लेकर चली राजनीतिक चर्चाओं और संगठन में बदलावों के बाद अब MCD में यह टूट पार्टी के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में और पार्षद या नेता इस नए गुट के साथ जाते हैं, तो दिल्ली की राजनीति में “तीसरे मोर्चे” की नई जमीन तैयार हो सकती है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि MCD में हुई यह टूट आने वाले महीनों में दिल्ली की राजनीति को और अधिक दिलचस्प और अस्थिर बना सकती है।

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