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ईरान युद्ध का असर अब अमेरिकी स्कूलों पर, डीजल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 17 मई 2026

ईरान युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में आई उथल-पुथल अब सीधे अमेरिका की शिक्षा व्यवस्था पर असर डालने लगी है। डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने अमेरिका के कई स्कूल जिलों के बजट को हिला कर रख दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि स्कूल बसें चलाना, जनरेटर ऑपरेट करना और बुनियादी सुविधाएं बनाए रखना तक मुश्किल होता जा रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन के याकिमा से लेकर टेक्सास के वाको तक कई स्कूल जिलों को अपने “इमरजेंसी फंड” तक इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं, ताकि बच्चों की स्कूल बस सेवा बंद न हो। वहीं दूरदराज के अलास्का में अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आने वाले महीनों में बिजली और हीटिंग के लिए पर्याप्त ईंधन कैसे जुटाया जाएगा।

याकिमा स्कूल डिस्ट्रिक्ट के सुपरिटेंडेंट ट्रेवर ग्रीन ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, “यह ऊंट की कमर पर केवल एक तिनका नहीं, बल्कि पूरा भूसे का ढेर है।” उनका कहना है कि पहले से महंगाई, कर्मचारियों की कमी और सीमित बजट से जूझ रहे स्कूल अब ईंधन संकट के कारण अतिरिक्त दबाव में आ गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से तेल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। अमेरिका जैसे बड़े देश में जहां लाखों छात्र रोजाना स्कूल बसों पर निर्भर हैं, वहां ईंधन की कीमतों में छोटी बढ़ोतरी भी अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ बन जाती है।

अमेरिका के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्कूल केवल बसों पर ही नहीं, बल्कि डीजल जनरेटर पर भी निर्भर हैं। अलास्का जैसे राज्यों में जहां तापमान बेहद कम रहता है, वहां स्कूलों को गर्म रखने और बिजली सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत पड़ती है। अधिकारियों का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में स्कूल संचालन प्रभावित हो सकता है।

शिक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो कई स्कूलों को परिवहन सेवाओं में कटौती करनी पड़ सकती है। कुछ जिलों में पहले ही बस रूट कम करने, अतिरिक्त गतिविधियां रोकने और ऊर्जा खर्च घटाने जैसे विकल्पों पर विचार शुरू हो चुका है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट दिखाता है कि वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव केवल सैन्य या तेल बाजार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचता है। अमेरिका जैसे विकसित देश में स्कूलों का बजट ईंधन संकट से प्रभावित होना इस बात का संकेत है कि ऊर्जा सुरक्षा अब सीधे शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ चुकी है।

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वह स्कूल जिलों के लिए विशेष सहायता पैकेज जारी करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर संकट और गहरा न हो। लेकिन अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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