अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताइवान को लेकर दी गई चेतावनी के बाद ताइवान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह पहले से ही एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। चीन से औपचारिक स्वतंत्रता घोषित न करने की ट्रंप की सलाह के बीच ताइवान सरकार ने कहा कि उसकी राष्ट्रीय पहचान और लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी घोषणा की मोहताज नहीं है। ताइवान की ओर से यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में हुई दो दिवसीय शिखर वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि ताइवान औपचारिक रूप से स्वतंत्रता की दिशा में बढ़े। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिका चीन के साथ किसी सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं चाहता और क्षेत्र में तनाव कम करने के पक्ष में है।
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते पहले भी कह चुके हैं कि ताइवान को अलग से स्वतंत्रता घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह खुद को पहले से ही एक संप्रभु राष्ट्र मानता है। शनिवार को राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता करेन कुओ ने कहा कि यह “स्वयं स्पष्ट” है कि ताइवान एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु देश है।
हालांकि ताइवान ने यह भी दोहराया कि वह चीन के साथ मौजूदा स्थिति बनाए रखना चाहता है। यानी ताइवान न तो औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा करेगा और न ही चीन के साथ एकीकरण की दिशा में बढ़ेगा। ताइवान में बड़ी संख्या में लोग खुद को अलग राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं, लेकिन अधिकांश लोग वर्तमान स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में बताए जाते हैं।
दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और कई बार यह संकेत दे चुका है कि जरूरत पड़ने पर वह बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेगा। बीजिंग लगातार ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को “अलगाववादी” और “क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा” बताता रहा है।
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था, “मैं नहीं चाहता कि कोई जाकर खुद को स्वतंत्र घोषित करे।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की ताइवान नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वॉशिंगटन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना चाहता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता और वह चाहते हैं कि चीन तथा ताइवान दोनों “शांत रहें।”
बीजिंग से लौटते समय ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की ताइवान मुद्दे पर “काफी विस्तार से” बातचीत हुई। ट्रंप के मुताबिक शी जिनपिंग ताइवान के सवाल को लेकर बेहद गंभीर हैं और किसी भी स्वतंत्रता आंदोलन को स्वीकार नहीं करेंगे।
इस बीच चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास और युद्धपोतों की गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। इससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराता रहा है, जिसे चीन अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले वर्ष ताइवान को लगभग 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने की योजना का ऐलान किया था। इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम और रॉकेट लॉन्चर शामिल थे। ट्रंप ने अब कहा है कि वह जल्द तय करेंगे कि यह सौदा आगे बढ़ेगा या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर उनकी और शी जिनपिंग की “विस्तृत चर्चा” हुई है।
ताइवान सरकार ने अमेरिका के समर्थन का स्वागत किया है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान, ताइवान स्ट्रेट में सुरक्षा बनाए रखने के लिए ट्रंप के समर्थन का आभारी है। उन्होंने कहा कि ताइवान अमेरिका के साथ सहयोग को और मजबूत करेगा ताकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव आने वाले समय में और बढ़ सकता है। एक तरफ चीन ताइवान पर अपना दावा लगातार मजबूत कर रहा है, वहीं अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में ताइवान वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील रणनीतिक केंद्र बना हुआ है।




