अंतरराष्ट्रीय / कूटनीति / एशिया | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/सिंगापुर | 19 मई 2026
सिंगापुर के सीनियर मिनिस्टर और पूर्व प्रधानमंत्री ली सीन लूंग पांच दिवसीय चीन दौरे पर पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब एशिया में आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ली सीन लूंग ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वे चीन के गुआंग्शी प्रांत की राजधानी नाननिंग पहुंच चुके हैं, जहां से उनकी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। इस दौरे के दौरान वे शंघाई भी जाएंगे और चीन के कई आर्थिक तथा तकनीकी संस्थानों का दौरा करेंगे। सिंगापुर प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य चीन और सिंगापुर के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाना और क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है। ली सीन लूंग के साथ वित्त, विदेश मामलों और डिजिटल विकास से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी चीन पहुंचे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीति नहीं बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के बीच बदलते आर्थिक संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार गुआंग्शी क्षेत्र इस दौरे का सबसे अहम केंद्र माना जा रहा है। गुआंग्शी चीन का ऐसा रणनीतिक प्रांत है जो समुद्री और जमीनी दोनों मार्गों से ASEAN देशों से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि बीजिंग इसे चीन-ASEAN कनेक्टिविटी के “गेटवे” के रूप में विकसित कर रहा है। ली सीन लूंग ने भी अपने संदेश में नाननिंग को ASEAN और चीन के बीच सहयोग का प्रमुख द्वार बताया।
सिंगापुर लंबे समय से चीन के साथ व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। खासकर गुआंग्शी के किनझोउ पोर्ट और न्यू इंटरनेशनल लैंड-सी ट्रेड कॉरिडोर में सिंगापुर की कंपनियों की बड़ी मौजूदगी है। पिछले वर्ष सिंगापुर और गुआंग्शी के बीच व्यापार लगभग 13.8 अरब युआन तक पहुंच गया था। वहीं शंघाई में करीब 7,000 सिंगापुर समर्थित निवेश परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें लगभग 28 अरब डॉलर का निवेश शामिल है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे के पीछे एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी छिपा है। अमेरिका-चीन तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच सिंगापुर संतुलित विदेश नीति बनाए रखना चाहता है। एक तरफ वह अमेरिका का महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार है, तो दूसरी तरफ चीन उसका सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी बना हुआ है। ऐसे में ली सीन लूंग की यह यात्रा एशियाई देशों की उस नीति को दर्शाती है जिसमें वे चीन के साथ आर्थिक सहयोग को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन की कोशिश कर रहे हैं।
शंघाई दौरे को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहां ली सीन लूंग चीन की नई तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) परियोजनाओं का अध्ययन करेंगे। शंघाई का “झांगजियांग AI आइलैंड” चीन के सबसे बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब्स में गिना जाता है, जहां 100 से अधिक AI कंपनियां काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि सिंगापुर चीन की तेजी से बढ़ती AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था को करीब से समझना चाहता है ताकि भविष्य की तकनीकी साझेदारियों को मजबूत किया जा सके।
आंकड़ों के अनुसार सिंगापुर 2013 से लगातार 13 वर्षों तक चीन में नए विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 119 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। यही कारण है कि चीन और सिंगापुर दोनों इस रिश्ते को केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चीन वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठकों के बीच सिंगापुर जैसे देशों के साथ बढ़ता संवाद यह दिखाता है कि बीजिंग एशिया में अपने आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।




