“लोकतंत्र की सबसे खतरनाक बीमारी तब शुरू होती है, जब जनता अन्याय को सामान्य मानने लगे”
ओपिनियन | प्रणव प्रियदर्शी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली 19 मई 2026 भारत में लोकतंत्र और राष्ट्रवाद को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन पिछले एक दशक में जिस तरह राजनीतिक विमर्श बदला है, उसने इस बहस को कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। सत्ता, राष्ट्रवाद, धर्म, मीडिया, विश्वविद्यालय, न्यायपालिका और नागरिक स्वतंत्रताओं…
