शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर 18 दिनों तक चली भूख हड़ताल और छात्र आंदोलन के बाद प्रशासन ने छात्रसंघ बहाली की दिशा में तारीखें तय करने का फैसला किया है। इस आंदोलन में 18 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे छात्र एबिन बेसिल ने इसे जामिया के विद्यार्थियों, विश्वविद्यालय और देश के लोकतंत्र की जीत बताया है।
एबिन ने आंदोलन के दौरान छात्रों को झेलनी पड़ी परेशानियों, प्रशासनिक कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बुनियादी सुविधाओं पर लगी पाबंदियों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों ने हिम्मत नहीं हारी और अपने संकल्प के दम पर इसे आगे बढ़ाया।
सुरक्षा गार्डों की मारपीट से शुरू हुआ टकराव
एबिन बेसिल के मुताबिक, जब छात्रों ने छात्रसंघ बहाली के लिए प्रदर्शन शुरू किया तो सबसे पहले सुरक्षा गार्डों ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। उनके दोस्तों को पीटा गया और आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की गई।
इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर को बंद करना शुरू कर दिया गया। पूरा कैंपस बंद कर दिया गया और कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गईं। एबिन ने बताया कि कैंपस के बाहर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 भी लागू की गई। उनके अनुसार, जामिया के आसपास ऐसा माहौल बना दिया गया था, जैसे आपातकाल लगा हो।
दो छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर तिहाड़ भेजा गया
एबिन ने बताया कि आंदोलन के दौरान NSUI जामिया के अध्यक्ष फैजान और छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता जीशान को भी गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियों और दबाव के बावजूद छात्रों ने आंदोलन जारी रखा।
उनका कहना था कि प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य छात्रों की आवाज को कमजोर करना था, लेकिन विद्यार्थियों की एकजुटता ने आंदोलन को टूटने नहीं दिया।
भूख हड़ताल के दौरान पानी, खाना और सैनिटरी पैड तक रोकने का दावा
एबिन ने आंदोलन के दौरान बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पानी और भोजन तक लाने की अनुमति नहीं दी गई। छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन तक अंदर नहीं आने दिए गए।
उन्होंने बताया कि उनकी स्वास्थ्य जांच के लिए आए डॉक्टर को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। एबिन के मुताबिक, भूख हड़ताल के दौरान ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिनसे छात्रों की सेहत और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
सरकार के दबाव में चुनाव रोकने की कोशिश का आरोप
एबिन बेसिल ने आशंका जताई कि जामिया प्रशासन पर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने का सरकारी दबाव था। उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद छात्रों ने अपनी इच्छाशक्ति और एकजुटता से आंदोलन को सफल बनाया।
एबिन ने कहा, “मैं जामिया के सभी छात्रों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। यह उनकी जीत है, जामिया विश्वविद्यालय की जीत है और इस देश में लोकतंत्र की जीत है।”
AMU के बाद जामिया, अब BHU में भी उठ रही बहाली की मांग
एबिन ने छात्रसंघ बहाली के आंदोलन को देशभर के विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली से जोड़ते हुए कहा कि पिछले महीने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में भी छात्रसंघ की बहाली हुई और अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में भी इसी तरह की मांग उठ रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश के विश्वविद्यालय परिसरों से लोकतांत्रिक गतिविधियां और छात्र प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहे हैं, छात्रसंघों की बहाली उम्मीद की किरण है। उन्होंने भाजपा सरकार और संघ परिवार पर देश के लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
8 नवंबर तक ऑनलाइन पढ़ाई, कैंपस खुलते ही विजय रैली
एबिन ने बताया कि फिलहाल जामिया परिसर बंद है और 8 नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। कैंपस दोबारा खुलने के बाद छात्र एक बड़ी विजय रैली निकालेंगे।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की सफलता के बावजूद छात्र अभी तक अपनी जीत का जश्न ठीक से नहीं मना पाए हैं। परिसर खुलने के बाद सभी छात्र मिलकर इस जीत का उत्सव मनाएंगे।
छात्र आंदोलन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने खड़ा किया सवाल
जामिया का यह आंदोलन केवल छात्रसंघ चुनाव की तारीख तय कराने तक सीमित नहीं रहा। इसने विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रशासनिक जवाबदेही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए हैं।
18 दिनों की भूख हड़ताल के बाद छात्रसंघ बहाली की दिशा में आगे बढ़ना आंदोलनकारी छात्रों के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब विद्यार्थियों की निगाहें तय प्रक्रिया और चुनाव की वास्तविक तारीख पर हैं। कैंपस खुलने के बाद प्रस्तावित विजय रैली इस लंबे आंदोलन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।


