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इम्फाल में मेईतेई-नगा संगठनों की विशाल रैली, बैनरों पर लिखा—‘भारत की प्रॉक्सी वॉर बंद करो’; SoO समझौता रद्द करने और असम राइफल्स हटाने की मांग

31 अक्टूबर को COCOMI और नगा संगठनों के संयुक्त आयोजन में सड़कों पर उतरे स्वदेशी समुदायों के लोग; विस्थापितों के पुनर्वास और 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC लागू करने की भी मांग

मणिपुर | ABC NATIONAL NEWS | इम्फाल | 1 नवंबर 2026

मणिपुर में जारी जातीय तनाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 31 अक्टूबर को इम्फाल में एक बड़ी रैली निकाली गई। COCOMI (Coordinating Committee on Manipur Integrity) और नगा संगठनों के संयुक्त आयोजन में मेईतेई, नगा तथा अन्य स्वदेशी समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बैनरों पर लिखा—“END INDIA’S PROXY WAR” यानी “भारत की प्रॉक्सी वॉर बंद करो।”

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मणिपुर में जारी संघर्ष को नियंत्रित करने के बजाय सरकार की नीतियां संकट को और गहरा कर रही हैं। आयोजकों ने आरोप लगाया कि कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सरकार का समझौता और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसले राज्य की एकता तथा शांति के प्रयासों को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, सरकार द्वारा किसी समुदाय या संगठन को प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप आयोजकों का राजनीतिक दावा है; इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

SoO समझौता रद्द करने की मांग

रैली की प्रमुख मांग कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को रद्द करना रही। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस समझौते की अवधि सितंबर 2026 में समाप्त हो चुकी है और इसे आगे जारी नहीं रखा जाना चाहिए।

SoO समझौता केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों के बीच संघर्षविराम और बातचीत की व्यवस्था से जुड़ा रहा है। इसके तहत निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था का पालन किया जाना अपेक्षित है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि समझौते का उद्देश्य हिंसा रोकना और शांति स्थापित करना है, तो उसकी प्रभावशीलता और अनुपालन की सार्वजनिक समीक्षा क्यों नहीं हो रही?

असम राइफल्स को हटाने की मांग

रैली में असम राइफल्स की तैनाती को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की मौजूदा भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें मणिपुर से हटाने की मांग की। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिस पर सभी समुदायों का भरोसा हो और जो किसी पक्ष के प्रति पक्षपाती दिखाई न दे।

यह मांग ऐसे समय उठी है, जब मणिपुर में सुरक्षा बलों की भूमिका, तैनाती और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

विस्थापितों की वापसी और NRC की मांग

रैली में 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और सुरक्षित घर वापसी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि हिंसा में घर छोड़ने को मजबूर हुए परिवारों को सुरक्षा, आवास और आजीविका की गारंटी दी जाए।

इसके अलावा 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की मांग भी उठाई गई। आयोजकों का तर्क है कि राज्य में मूल निवासियों की पहचान और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी है। हालांकि, NRC के आधार वर्ष और उसके क्रियान्वयन को लेकर संवैधानिक, प्रशासनिक और मानवीय पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी।

2023 से जारी संघर्ष के बीच बढ़ती बेचैनी

मणिपुर में मई 2023 से मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, हजारों परिवार विस्थापित हुए और कई इलाकों में सामाजिक संबंध तथा सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुए। हालिया हमलों ने एक बार फिर तनाव और असुरक्षा की भावना बढ़ाई है।

31 अक्टूबर की रैली ने स्पष्ट किया कि मणिपुर में शांति बहाली केवल सुरक्षा बलों की तैनाती या समझौतों तक सीमित नहीं रह सकती। विस्थापितों की सुरक्षित वापसी, सभी समुदायों का भरोसा, उग्रवादी संगठनों के साथ समझौतों की पारदर्शी समीक्षा और राजनीतिक संवाद इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

सरकार के सामने बड़ा सवाल

इम्फाल की इस रैली में उठी मांगें केंद्र और मणिपुर सरकार के सामने कई गंभीर सवाल रखती हैं। क्या SoO समझौते की समीक्षा सार्वजनिक रूप से होगी? क्या विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी के लिए समयबद्ध योजना बनेगी? और क्या सभी समुदायों को भरोसे में लेकर स्थायी शांति का रास्ता निकाला जाएगा?

मणिपुर को नारों और आरोपों से आगे बढ़कर जवाब, न्याय और विश्वास की जरूरत है। किसी भी समुदाय को सामूहिक रूप से दोषी ठहराए बिना हिंसा, उग्रवाद और मानवाधिकार उल्लंघनों पर निष्पक्ष कार्रवाई ही स्थायी शांति की बुनियाद बन सकती है।

संपादकीय तथ्य-जांच नोट: इस रैली और उसके बैनरों के बारे में उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर खबर तैयार की गई है। 31 अक्टूबर की घटना, आयोजकों की मांगों और सितंबर में SoO की समाप्ति की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अभी विश्वसनीय रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए। इसलिए आयोजकों के आरोपों को स्पष्ट रूप से उनके दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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