राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 नवंबर 2026
नई दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को INDIA bloc की विशाल रैली ने केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की लामबंदी को एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन में बदल दिया। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ जुटे विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के सवाल पर सरकार को घेरा। मंच से एक के बाद एक नेताओं ने अपनी बात रखी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई।
रैली का सबसे सीधा और आक्रामक संदेश लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार के बाद अब उनकी जवाबदेही तय करने की लड़ाई होगी। राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाना पहला कदम है और उसके बाद मोदी तथा शाह के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
राहुल गांधी ने कहा, “अमित शाह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाएंगे। हम कहते हैं कि हम उन्हें कहीं जाने नहीं देंगे। ज्ञानेश कुमार के बाद अब हम आपके लिए आएंगे। आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। आप कहीं भाग नहीं पाएंगे।”
उन्होंने साफ किया कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि कानूनी लड़ाई भी लड़ेगा। राहुल ने कहा कि यह संघर्ष देश के नागरिकों के मताधिकार और संविधान की रक्षा के लिए है।
### ‘वोट चोरी कोई आम चोरी नहीं, करोड़ों लोगों की आवाज की चोरी है’
राहुल गांधी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लोकतंत्र के लिए सबसे गंभीर सवालों में शामिल किया। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने इसे कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत और हर सात में से एक मतदाता के बराबर बताया।
राहुल ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्ष के बीच जीत का अंतर लगभग तीन प्रतिशत था। ऐसे में मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का सवाल चुनावी नतीजों और देश के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से सीधे जुड़ता है।
उन्होंने कहा, “यह कोई सामान्य चोरी नहीं है कि किसी दुकान से सामान चोरी कर लिया गया। यह हर व्यक्ति की आवाज की चोरी है।” राहुल गांधी ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताते हुए देशद्रोह करार दिया और कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनकी भूमिका नहीं होती तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बनते। राहुल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को जेल जाना पड़ेगा और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होगी।
### RSS-BJP पर संस्थाओं पर कब्जे और नफरत फैलाने का आरोप
राहुल गांधी ने अपने भाषण में RSS और भाजपा पर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं देश की जनता की हैं, किसी संगठन या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं।
उन्होंने कहा कि मोदी, शाह और RSS ने देश में नफरत फैलाकर भारत की आत्मा को नुकसान पहुंचाया है। राहुल ने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति और आर्थिक संसाधनों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों में सिमट गया है।
अडानी और अंबानी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ कर दिए जाते हैं, जबकि किसान का बेटा कर्ज चुकाने में असमर्थ होने पर जेल जाने की नौबत का सामना करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश की अर्थव्यवस्था कुछ लोगों के हितों के लिए क्यों चलाई जा रही है, जबकि किसान, मजदूर और युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राहुल ने कहा कि उन्हें मोदी, शाह या ज्ञानेश कुमार से व्यक्तिगत नफरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई नफरत के खिलाफ और नागरिकों के अधिकारों के लिए है। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “भारत के हर नागरिक की आवाज मेरे लिए धर्म से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। जनता की आवाज ही मेरा धर्म है।”
### खड़गे का ऐलान—ज्ञानेश कुमार के हटने तक लड़ाई जारी रहेगी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रैली में कहा कि देश की महिलाओं, युवाओं और दलितों के मताधिकार पर हमला हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से नहीं हटते। उनका संदेश साफ था—यह कोई एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को अपने मताधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने और इस लड़ाई को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने की अपील की।
### ममता बनर्जी का तंज—‘वैनिश कुमार, आप कब गायब होंगे?’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने भाषण में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘वैनिश कुमार’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने मंच से सवाल किया, “वैनिश कुमार जी, आप कब गायब होंगे? हम इंतजार कर रहे हैं।”
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बंगाल के लोगों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतगणना पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “वोट चोरी, यस पापा; लोकतंत्र चोरी, यस पापा; लूट की, यस पापा; पर्दे के पीछे कौन है, भाजपा पापा।”
ममता ने कहा कि बंगाल की जनता अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उनका भाषण इस संदेश के साथ खत्म हुआ कि लोकतंत्र किसी सत्ता या संगठन की जागीर नहीं है।
### अखिलेश यादव का हमला—‘वोट चोरी, चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी करने वालों का अंत होगा’
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा के ‘डबल इंजन’ नारे पर तंज कसते हुए उसे ‘डबल जीरो’ बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाया और कहा कि अब भाजपा के अपने समर्थकों के नाम भी कटने की बात सामने आ रही है।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब दूसरे वर्गों के मतदाताओं के नाम काटे जा रहे थे, तब भाजपा को इसकी चिंता क्यों नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति में नागरिकों के अधिकारों से ज्यादा चुनावी फायदे को महत्व दिया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे का मुद्दा उठाते हुए कहा, “जो वोट चोरी, चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी करते हैं, उनका अंत होगा।”
उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान से उठी आवाज उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों तक पहुंचेगी। उनका कहना था कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का सवाल केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है जिसका वोट लोकतंत्र में उसकी हिस्सेदारी तय करता है।
### तेजस्वी यादव बोले—‘रामलीला मैदान आज कुरुक्षेत्र बन गया है’
RJD नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में महाभारत का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान आज कुरुक्षेत्र बन गया है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता को एकजुट होना होगा।
तेजस्वी ने कहा, “अगर आज शकुनि अपनी चाल चल रहा है, तो हमें इस मैदान को कुरुक्षेत्र बनाना होगा।”
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों का जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि जिन चुनावों पर गंभीर सवाल हैं, उनके बारे में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
तेजस्वी ने पहले भी बिहार और बंगाल के चुनाव रद्द कर नए चुनाव कराने की मांग की थी। रामलीला मैदान से उन्होंने विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने और मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
### नेहा बोरा ने BJP-RSS से पूछा—नागरिकों से बार-बार सबूत क्यों मांगा जा रहा है?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने अपने संबोधन में भाजपा और RSS की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जो संगठन देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बात करते हैं, वे आज देश के नागरिकों से बार-बार उनकी नागरिकता और पहचान का सबूत क्यों मांग रहे हैं?
नेहा बोरा ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार मिलना चाहिए। वोट देने का अधिकार किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक की बुनियादी हिस्सेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और गरीब मजदूरों को बार-बार लंबी कतारों में खड़ा करके अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित तबकों को अपने ही देश में अधिकारों के लिए संघर्ष करने की स्थिति में धकेला जा रहा है।
नेहा बोरा ने कहा कि नागरिकों के मताधिकार पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने भाजपा और RSS की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को डराने के बजाय उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
### फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी उठाई आवाज
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने अपने भाषण में मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाली राजनीति को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने देश के लिए अपना खून दिया है और आगे भी देश के लिए योगदान देते रहेंगे। उन्होंने भाजपा और RSS से मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाना बंद करने को कहा।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने लोगों से लोकतंत्र के सामने खड़ी चुनौतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि लोग अभी अपने अधिकारों के लिए नहीं उठे, तो बहुत देर हो जाएगी। उन्होंने देश की संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में जाने और राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए भाजपा की राजनीति पर सवाल उठाए।
### 21 विपक्षी दलों की एकजुटता, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
रामलीला मैदान की रैली से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें 21 INDIA bloc दलों ने छह बिंदुओं वाला प्रस्ताव पारित किया और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
1 नवंबर को इसी मांग को लेकर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला और रामलीला मैदान में सभा की। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, RJD और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को व्यापक राजनीतिक प्रदर्शन का रूप दिया।
### रामलीला मैदान से सत्ता को सीधी चुनौती
रैली में उठे सवाल केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद तक सीमित नहीं रहे। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची, SIR, नागरिकता के प्रमाण, चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और आर्थिक असमानता को एक साथ उठाया।
खड़गे ने संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा। अखिलेश यादव ने वोट चोरी और चंदा चोरी का मुद्दा उठाया। तेजस्वी यादव ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। नेहा बोरा ने नागरिकों से बार-बार पहचान का प्रमाण मांगने की राजनीति को चुनौती दी। फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी अपने संबोधन में अधिकारों और लोकतंत्र का मुद्दा उठाया।
लेकिन इस पूरे आयोजन का सबसे सीधा राजनीतिक संदेश राहुल गांधी ने दिया—पहले ज्ञानेश कुमार को हटाने की लड़ाई, उसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जवाबदेही के लिए कानूनी कार्रवाई।
रामलीला मैदान से राहुल गांधी की चेतावनी थी—“ज्ञानेश कुमार के बाद अब आपकी बारी। आप कहीं भाग नहीं पाएंगे। कानून के तहत कार्रवाई होगी।”


