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सिंघवी ने ज्ञानेश कुमार के हलफनामे पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग करेगा पक्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा—हलफनामे में कई महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट नहीं; बैठक के मिनट्स, नोट्स और लिखित दस्तावेजों की उपलब्धता पर उठाया सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 नवंबर 2026

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे पर वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हलफनामा कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट करने के बजाय कुछ सवालों को और सामने लाता है। सिंघवी के अनुसार, इसमें कुछ ऐसी बातें भी हैं जिन्हें स्पष्ट या अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा सकता है।

सिंघवी ने विशेष रूप से चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था, तो उस बैठक के मिनट्स, नोट्स और लिखित दस्तावेज कहां हैं?

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

सिंघवी ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग के संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि मामले की सुनवाई के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध रहें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि बैठक के मिनट्स उपलब्ध नहीं हैं, तो अदालत से इस आधार पर प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने का अनुरोध किया जा सकता है। कानूनी भाषा में इसे ‘एडवर्स इन्फरेंस’ कहा जाता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय अदालत का होगा।

कानूनी प्रक्रिया के साथ लोकतांत्रिक जवाबदेही भी जरूरी

सिंघवी ने कहा कि कानून की प्रक्रिया तकनीकी होती है और इसमें समय लगता है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को सीधे पद से हटाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सार्वजनिक संवाद, सवाल उठाना और कानूनी प्रक्रिया के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिक जिम्मेदारी के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को आलोचना और जनता की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लेना चाहिए।

अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर

इस मामले में अब चुनाव आयोग के हलफनामे, निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

मुख्य सवाल यह है कि संबंधित निर्णयों के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई, बैठक के मिनट्स और अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं तथा आयोग अपने फैसलों का आधार अदालत के सामने किस तरह रखता है।

सिंघवी की ये टिप्पणियां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं।

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