अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान / कुवैत सिटी / वॉशिंगटन | 4 जून 2026
खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का दायरा बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता दिखाई दे रहा है। बुधवार को स्थिति और गंभीर हो गई जब ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष हमलों का सिलसिला तेज हो गया। कुवैत ने दावा किया कि ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में उसके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
कुवैत एयरपोर्ट हमले पर ईरान-अमेरिका के दावे आमने-सामने
कुवैत सरकार ने हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इस आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि एयरपोर्ट को हुआ नुकसान अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली की तकनीकी विफलता के कारण हुआ। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच वास्तविक स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन घटना ने क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
बहरीन में ईरान समर्थक नेटवर्क पर कार्रवाई
ईरान के हमलों के बाद बहरीन ने सुरक्षा अभियान तेज कर दिया है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने 15 लोगों को गिरफ्तार करने की घोषणा की है, जिन पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है। पिछले कुछ महीनों में बहरीन में ऐसे कई अभियान चलाए गए हैं। अप्रैल में 69 लोगों की नागरिकता भी समाप्त कर दी गई थी, जिन पर ईरान समर्थित गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। बहरीन लंबे समय से ईरान और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
लेबनान को लेकर ईरान की खुली चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इजराइल ने बेरूत या उसके उपनगरों पर व्यापक हमला किया तो इसका परिणाम “पूर्ण युद्ध की वापसी” होगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने पहले ही अपने सशस्त्र बलों को हाई अलर्ट पर रखा है और किसी भी नए इजराइली हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका दावा कर रहा है कि उसने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने में सफलता हासिल की है।
दक्षिणी लेबनान में इजराइली अभियान जारी
युद्धविराम की चर्चाओं के बावजूद दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य अभियान जारी है। नबातियेह और बिंत जुबैल जिलों में इजराइली ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। वहीं हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने ब्यूफोर्ट कैसल क्षेत्र में तैनात इजराइली सैनिकों और सैन्य ठिकानों पर रॉकेट, ड्रोन और तोपखाने से कई हमले किए हैं। हाल के दिनों में यह क्षेत्र संघर्ष का नया केंद्र बन गया है।
अमेरिका ने बढ़ाई आर्थिक और सैन्य घेराबंदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि उसने अप्रैल के मध्य से अब तक 125 से अधिक व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदलवाया है ताकि ईरान के समुद्री व्यापार और तेल निर्यात पर दबाव बनाया जा सके। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी को और सख्त किया है। वॉशिंगटन का मानना है कि आर्थिक दबाव और सैन्य कार्रवाई के संयोजन से ईरान को वार्ता की मेज पर लाया जा सकता है।
दोनों पक्ष जीत की कहानी गढ़ने में जुटे
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संघर्ष में सैन्य जीत के साथ-साथ राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक जीत की कहानी भी गढ़ना चाहते हैं। कतर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ अब्दुल्ला अल-एतैबी के अनुसार दोनों पक्ष अपने समर्थकों और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे कमजोर नहीं पड़े हैं। यही कारण है कि सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत एक साथ चल रही हैं।
खाड़ी देशों की बढ़ती चिंता
कतर के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जासिम अल थानी ने ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए हमलों को “अस्वीकार्य” और “चौंकाने वाला” बताया है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को इस संकट के समय एकजुट रहना चाहिए और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। खाड़ी देशों को डर है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और उनकी आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया फिर बड़े संघर्ष के मुहाने पर
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीमित संघर्ष नहीं रह गई है। इसमें इजराइल, हिजबुल्लाह, खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होती जा रही हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो पूरा पश्चिम एशिया एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व राजनीति पर भी पड़ेगा।
युद्ध और शांति के बीच झूलता पश्चिम एशिया
पश्चिम एशिया युद्ध और कूटनीति के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। एक ओर मिसाइलें, ड्रोन और सैन्य अभियान जारी हैं, तो दूसरी ओर बैक-चैनल बातचीत और युद्धविराम की कोशिशें भी चल रही हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्षेत्र तनाव कम होने की दिशा में बढ़ता है या फिर एक बड़े और लंबे संघर्ष की ओर।




