अंतरराष्ट्रीय/विज्ञान | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
भारतीय मूल के नासा (NASA) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह पहली बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहर निकलकर स्पेसवॉक (EVA) करेंगे। यह उनके अंतरिक्ष करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस मिशन के दौरान वे अंतरिक्ष स्टेशन के सोलर पावर सिस्टम को अपग्रेड करने, संचार एंटीना बदलने, बिजली और डेटा केबल स्थापित करने तथा भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए स्टेशन को तैयार करने जैसे कई महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों को अंजाम देंगे।
नासा के अनुसार अनिल मेनन 6 अगस्त, 13 अगस्त और 25 अगस्त को कुल तीन स्पेसवॉक करेंगे। पहले स्पेसवॉक में वह अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर (Jessica Meir) के साथ मिलकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) की भविष्य में होने वाली स्थापना की तैयारी करेंगे। इस नई सौर ऊर्जा प्रणाली से अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जिससे वैज्ञानिक प्रयोगों और स्टेशन के सुरक्षित संचालन में मदद मिलेगी।
13 अगस्त को होने वाले दूसरे स्पेसवॉक के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन के स्पेस-टू-ग्राउंड कम्युनिकेशन एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बीच उच्च गति से डेटा और संचार बनाए रखने का प्रमुख माध्यम है। इसके सफल प्रतिस्थापन से स्टेशन की संचार क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
वहीं 25 अगस्त को होने वाले तीसरे स्पेसवॉक में अनिल मेनन और उनकी टीम बिजली आपूर्ति से जुड़े पावर चैनल केबल, डेटा रिले सिस्टम और अन्य तकनीकी उपकरणों का रखरखाव करेंगे। इसके अलावा वे हार्मनी मॉड्यूल (Harmony Module) के फॉरवर्ड पोर्ट पर लगे उस नेविगेशन सिस्टम को भी बदलेंगे, जिसकी मदद से अंतरिक्ष यान सुरक्षित रूप से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से डॉकिंग करते हैं।
अनिल मेनन का संबंध केरल के पलक्कड़ से है। उनका जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। उनके पिता भारतीय मूल के हैं, जबकि उनकी मां यूक्रेनी मूल की हैं। वे पेशे से चिकित्सक, मैकेनिकल इंजीनियर और अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वे आपातकालीन चिकित्सा और एयरोस्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं।
अनिल मेनन 14 जुलाई 2026 को सोयूज एमएस-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे। वे लगभग आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और रखरखाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लेंगे।
हाल ही में अनिल मेनन ने अंतरिक्ष से स्पेसएक्स के स्टारबेस (Starbase) लॉन्च स्थल की तस्वीरें साझा की थीं, जिन्हें दुनिया भर में काफी सराहा गया। उन्होंने अंतरिक्ष से ली गई इन तस्वीरों के साथ सफल प्रक्षेपण की शुभकामनाएं भी दी थीं।
अनिल मेनन का यह पहला स्पेसवॉक न केवल नासा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष समुदाय के लिए भी गर्व का क्षण माना जा रहा है। अंतरिक्ष स्टेशन के आधुनिकीकरण और भविष्य के मिशनों की तैयारी में उनकी भूमिका को अत्यंत अहम माना जा रहा है।




