अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद | 18 सितंबर 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर पाकिस्तान पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और देश में गैस तथा बिजली की आपूर्ति पर संभावित दबाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने इन उपायों को अगले तीन महीने तक लागू रखने का फैसला किया है।
पाकिस्तान की कैबिनेट ने गुरुवार को खर्च और ईंधन की खपत कम करने के लिए कई बचत संबंधी उपायों को मंजूरी दी। इसके तहत सरकारी वाहनों के लिए ईंधन का आवंटन 50 प्रतिशत तक कम किया जाएगा। हालांकि, सेना, कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और जरूरी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को इस कटौती से बाहर रखा गया है।
सरकार ने कारोबार के समय को लेकर भी नए नियम लागू किए हैं। बाजारों को रात 9 बजे तक बंद करना होगा। वहीं शादी समारोह आयोजित करने वाले मैरिज हॉल को रात 10 बजे तक और रेस्तरां को रात 11 बजे तक संचालन की अनुमति होगी। हालांकि, दवा की दुकानों और मेडिकल लैबोरेटरी को इन समय संबंधी पाबंदियों से छूट दी गई है।
पाकिस्तान सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर हैं। पाकिस्तान में भी महंगे ईंधन का असर परिवहन, बिजली उत्पादन और आम लोगों के घरेलू खर्च पर पड़ने की चिंता बढ़ी है।
सरकार पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए कुछ वर्गों को राहत देने की योजना लागू कर रही है। इसी क्रम में पात्र मोटरसाइकिल, रिक्शा और 800cc तक के वाहनों के लिए प्रति लीटर 100 पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी देने की योजना का राष्ट्रव्यापी विस्तार किया जा रहा है।
ईंधन बचाने के लिए उठाए गए नए कदमों का असर सरकारी कामकाज और बाजारों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य फिलहाल ईंधन की खपत और सरकारी खर्च को नियंत्रित करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी का असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर कम से कम पड़े।
पाकिस्तान के सामने चुनौती सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं है। अगर वैश्विक तेल बाजार में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो इससे आयात बिल, परिवहन लागत और बिजली उत्पादन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए एक तरफ आम लोगों को राहत देना और दूसरी तरफ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार द्वारा घोषित ये उपाय फिलहाल तीन महीने के लिए हैं। आने वाले समय में पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में होने वाले बदलाव यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि पाकिस्तान को इन प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ती है या नहीं।



