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चीन के दुर्लभ खनिज भंडार अनुमान से कहीं बड़े! दुनिया की सप्लाई पर और मजबूत हो सकती है बीजिंग की पकड़

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 28 जुलाई 2026

दुनिया में दुर्लभ खनिज (Rare Earth Elements) के सबसे बड़े उत्पादक चीन की रणनीतिक बढ़त आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है। चीन के प्रमुख भूवैज्ञानिकों का दावा है कि इनर मंगोलिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बयान ओबो (Bayan Obo) खदान में दुर्लभ खनिजों का वास्तविक भंडार मौजूदा आधिकारिक अनुमान से कहीं अधिक हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमीन के भीतर अधिक खनिज मौजूद होने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें आर्थिक रूप से निकाल पाना भी उतना ही आसान होगा।

बीजिंग विश्वविद्यालय (Peking University) के भूवैज्ञानिक यांग ली के अनुसार, बयान ओबो खदान पिछले तीन दशकों से वैश्विक रेयर अर्थ उत्पादन की रीढ़ बनी हुई है। वर्तमान आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस खदान में लगभग 10 करोड़ टन (100 मिलियन टन) दुर्लभ खनिजों का भंडार है, लेकिन हालिया वैज्ञानिक अध्ययन संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र की वास्तविक भू-वैज्ञानिक क्षमता इससे कहीं अधिक हो सकती है।

यांग ली के नेतृत्व में वर्ष 2025 में किए गए एक शोध में पाया गया कि बयान ओबो खनिज क्षेत्र का निर्माण किसी एक भू-वैज्ञानिक घटना से नहीं, बल्कि करोड़ों वर्षों तक चली कई अलग-अलग भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप हुआ। शोध के मुताबिक यहां लगभग 1.3 अरब वर्ष पुरानी कार्बोनेटाइट चट्टानों के साथ-साथ 43 करोड़ वर्ष पुरानी दूसरी कार्बोनेटाइट गतिविधि भी हुई, जिसने दुर्लभ खनिजों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यही नई वैज्ञानिक समझ भविष्य में इस क्षेत्र में अतिरिक्त खनिज संसाधनों की खोज का आधार बन सकती है। यदि आगे के सर्वेक्षण इस संभावना की पुष्टि करते हैं तो चीन के पास दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ खनिज संसाधनों पर पहले से भी अधिक नियंत्रण स्थापित करने का अवसर होगा।

हालांकि विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। उनका कहना है कि भू-वैज्ञानिक संसाधन (Resources) और व्यावसायिक रूप से निकाले जा सकने वाले भंडार (Reserves) अलग-अलग अवधारणाएं हैं। जमीन के भीतर खनिज मौजूद होना पर्याप्त नहीं है; उनकी गुणवत्ता, गहराई, खनन लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और आर्थिक व्यवहार्यता भी यह तय करती है कि उन्हें व्यावसायिक रूप से निकाला जा सकता है या नहीं।

रेयर अर्थ खनिज आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा संयंत्रों, सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन, रक्षा उपकरणों, मिसाइल प्रणालियों और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में होता है। यही वजह है कि हाल के वर्षों में अमेरिका, यूरोप और कई अन्य देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में जुटे हैं।

यदि भविष्य के सर्वेक्षणों में बयान ओबो के अनुमानित भंडार और बड़े साबित होते हैं, तो इससे वैश्विक दुर्लभ खनिज बाजार में चीन की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस संभावना को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदलने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, नई खोज और तकनीकी मूल्यांकन अभी बाकी हैं।

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