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ECI बना BJP का एक्सटेंशन — बूथ एजेंट नियम बदलकर चुनावी खेल बिगाड़ा गया: TMC

कोलकाता 12 नवंबर 2025

तृणमूल कांग्रेस ने आज चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आयोग ने “चुपके और चालाकी से” बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति के नियमों में संशोधन कर दिया है — और यह बदलाव किसी प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक हित साधने के लिए किया गया है।

पार्टी का कहना है कि 2023 में जारी गाइडलाइंस के अनुसार, “BLA को उसी भाग (Part) के वोटर लिस्ट में पंजीकृत मतदाता होना अनिवार्य था”, यानी जो एजेंट किसी बूथ की वोटर लिस्ट देखेगा, उसे उसी इलाके का वोटर होना चाहिए। लेकिन अब आयोग के नए आदेश दिनांक 11 नवंबर 2025 के अनुसार यह नियम बदल दिया गया है। अब अगर उसी भाग में एजेंट न मिले, तो “किसी भी रजिस्टर मतदाता को उसी विधानसभा क्षेत्र से एजेंट बनाया जा सकता है।”

तृणमूल कांग्रेस ने इस संशोधन को बेहद खतरनाक और संदिग्ध बताया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा, “जब BLOs (Booth Level Officers) को उसी बूथ या उसी पोलिंग स्टेशन से चुना जाता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे, तो BLAs के लिए यह छूट क्यों दी गई? क्या BJP को अब बूथ स्तर पर अपने लोग नहीं मिल रहे, इसलिए वे बाहरी एजेंट लाकर पूरी प्रक्रिया को भीतर से प्रभावित करना चाहते हैं?”

पार्टी ने इस कदम को ‘लोकतंत्र की बुनियाद पर सीधा हमला’ बताया। उनके मुताबिक यह संशोधन दरअसल BJP को चुनावी प्रक्रिया में “इंसाइडर एक्सेस” दिलाने की कोशिश है — ताकि वे विपक्षी वोट बैंकों में हेरफेर कर सकें, स्थानीय मतदाताओं की पहचान और प्रवाह को बाधित कर सकें।

तृणमूल के बयान में यह भी कहा गया है कि यह बदलाव चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गहरी चोट है। “जिस आयोग पर कभी जनता का विश्वास था, उसे अब सत्ताधारी पार्टी का अधीनस्थ बना दिया गया है। जब गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय के सचिव को मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया, तब ही साफ हो गया था कि अब नियम BJP की सुविधा के हिसाब से बदलेंगे।”

तृणमूल ने तीखे शब्दों में कहा, “BJP ने लोकतंत्र को खेल बना दिया है — जब जीत नहीं सकते, तो अंपायर को खरीद लो। यही अब भारत के चुनावी तंत्र की सच्चाई है। यह बदलाव न सिर्फ जनादेश का अपमान है, बल्कि चुनाव आयोग की साख पर भी दाग है।”

पार्टी ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की है और मांग की है कि चुनाव आयोग तुरंत इस संशोधन को रद्द करे, क्योंकि यह लोकतंत्र में निष्पक्षता की रीढ़ को कमजोर कर रहा है।

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