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खिलाड़ी भुवनेश्वर कुमार से सीखें: खुद को बदलें, वापसी का रास्ता खुद बनाएं

स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | 7 अक्टूबर 2026

भारतीय क्रिकेट में टीम से बाहर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका होता है। लेकिन असली परीक्षा तब शुरू होती है, जब वापसी की उम्मीद धीरे-धीरे खत्म होती नजर आने लगे। भुवनेश्वर कुमार की चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी इसी संघर्ष, बदलाव और लगातार मेहनत की कहानी है।

36 साल की उम्र में न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुने गए भुवनेश्वर ने यह साबित किया है कि टीम से बाहर होने के बाद खिलाड़ी सिर्फ चयनकर्ताओं के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। उसे अपने खेल को बदलना होता है, खुद को फिर साबित करना होता है और यह दिखाना होता है कि बदलते क्रिकेट में उसकी उपयोगिता अभी खत्म नहीं हुई है।

चार साल तक टीम इंडिया से दूर रहे भुवनेश्वर

भुवनेश्वर ने नवंबर 2022 में भारत के लिए आखिरी मुकाबला खेला था। इसके बाद वह राष्ट्रीय टीम की योजनाओं से बाहर होते चले गए। 2022 में भी उनका प्रदर्शन खराब नहीं था। उन्होंने 32 T20I मैचों में 37 विकेट लिए थे और उनका इकॉनमी रेट 6.98 रहा था। लेकिन चयनकर्ताओं ने आगे बढ़ते हुए युवा तेज गेंदबाजों को मौका देना शुरू किया।

भुवनेश्वर ने इसके बाद भी क्रिकेट नहीं छोड़ा। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की और 2023 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 16 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 9.31 और इकॉनमी 5.84 रही।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई। 2024 में उत्तर प्रदेश की ओर से बंगाल के खिलाफ उन्होंने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट पर 41 रन दिए।

IPL में शुरुआत साधारण, फिर आया बड़ा बदलाव

भुवनेश्वर के लिए IPL के शुरुआती दो साल वापसी के लिहाज से बहुत खास नहीं रहे। IPL 2024 में उन्होंने 11 विकेट लिए और 9.35 की इकॉनमी से रन दिए। 2025 में 17 विकेट मिले, लेकिन इकॉनमी 9.29 रही।

ऐसे आंकड़ों के साथ भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद मुश्किल थी।

लेकिन IPL 2026 ने पूरी कहानी बदल दी।

Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए भुवनेश्वर ने 28 विकेट हासिल किए और 7.95 की इकॉनमी से गेंदबाजी की। वह सिर्फ विकेट लेने में ही सफल नहीं रहे, बल्कि पावरप्ले और डेथ ओवरों जैसे मुश्किल चरणों में भी प्रभावी रहे।

पावरप्ले में उन्होंने 34 ओवर किए और 17 विकेट लिए। उनकी इकॉनमी 6.94 रही। डेथ ओवरों में 18 ओवर में नौ विकेट हासिल किए और इकॉनमी 8.50 रही।

यही प्रदर्शन उनकी वापसी की सबसे बड़ी वजह बना।

भुवनेश्वर ने सिर्फ इंतजार नहीं किया, अपना खेल बदला

भुवनेश्वर की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ उनके विकेट नहीं हैं। असली बदलाव उनकी गेंदबाजी में आया।

अपने शुरुआती करियर में वह स्विंग के लिए जाने जाते थे। नई गेंद को दोनों तरफ घुमाना उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। लेकिन समय के साथ बल्लेबाज उनकी गेंदबाजी को पढ़ने लगे।

भुवनेश्वर ने यहां बदलाव किया।

उन्होंने वॉबल सीम और स्क्रैम्बल्ड सीम का ज्यादा इस्तेमाल शुरू किया, जिससे गेंद की दिशा और मूवमेंट का अंदाजा लगाना बल्लेबाजों के लिए मुश्किल हुआ। उन्होंने अपनी लेंथ में भी बदलाव किया और सिर्फ अपनी पुरानी गेंदबाजी पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक T20 क्रिकेट की जरूरत के मुताबिक खुद को ढाला।

लेंथ बदली, यॉर्कर का इस्तेमाल बदला

भुवनेश्वर के खेल में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उनकी लेंथ में देखने को मिला।

पहले वह 6 से 8 मीटर की लेंथ पर ज्यादा निर्भर रहते थे। IPL 2026 में उन्होंने 8 से 10 मीटर की लेंथ का भी प्रभावी इस्तेमाल किया। इस बदलाव ने उन्हें बल्लेबाजों के लिए ज्यादा मुश्किल गेंदबाज बनाया।

उन्होंने यॉर्कर को भी सिर्फ डेथ ओवरों का हथियार नहीं रहने दिया। नई गेंद के साथ भी यॉर्कर का इस्तेमाल किया और इस तरह अपनी गेंदबाजी में एक और विकल्प जोड़ा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने लगातार नई गेंदें जोड़ने के बजाय अपनी मौजूदा गेंदों के इस्तेमाल को बेहतर किया। कब कौन-सी गेंद करनी है, किस लेंथ पर करनी है और किस बल्लेबाज के खिलाफ कौन-सा विकल्प इस्तेमाल करना है—इस सोच में बदलाव उनकी वापसी की बड़ी वजह बना।

भुवनेश्वर की वापसी सिर्फ उम्र के खिलाफ जीत नहीं

36 साल की उम्र में भारतीय टीम में वापसी अपने आप में खास है, लेकिन इसे सिर्फ उम्र के खिलाफ जीत मानना इस कहानी को छोटा करना होगा।

भुवनेश्वर ने पिछले कुछ वर्षों में चयन की चिंता से ज्यादा अपने प्रदर्शन पर ध्यान दिया। उन्होंने IPL में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और RCB के साथ 2025 और 2026 में खिताबी सफलता का हिस्सा बने। पिछले दो IPL सत्रों में उन्होंने कुल 45 विकेट लिए।

भारतीय टीम में वापसी के बाद अब उनके सामने अगली चुनौती अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को फिर साबित करने की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच T20 मैचों की सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होगी।

टीम से बाहर खिलाड़ियों के लिए बड़ा सबक

भुवनेश्वर कुमार की वापसी उन खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा सबक है जो किसी समय भारतीय टीम का हिस्सा रहे लेकिन अब चयनकर्ताओं की योजनाओं से बाहर हैं।

सिर्फ यह सोचते रहना कि मुझे फिर मौका मिलना चाहिए, काफी नहीं है।

मौका मांगने के बजाय ऐसा प्रदर्शन करना जरूरी है कि चयनकर्ताओं के पास आपको नजरअंदाज करने की वजह कम रह जाए।

भुवनेश्वर ने अपने पुराने खेल को जस का तस दोहराने की कोशिश नहीं की। उन्होंने खेल को समझा, अपनी कमियों को पहचाना और अपनी गेंदबाजी को नए T20 दौर के मुताबिक ढाला।

वापसी अतीत दोहराने से नहीं, खुद को बदलने से होती है

भुवनेश्वर कुमार की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है—खेल बदलता है तो खिलाड़ी को भी बदलना पड़ता है।

चार साल तक भारतीय टीम से दूर रहने के बाद उन्होंने यह नहीं दिखाया कि वह पहले कितने अच्छे थे। उन्होंने यह दिखाया कि आज वह टीम को क्या दे सकते हैं।

इसीलिए भुवनेश्वर की वापसी सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं है। यह उन तमाम क्रिकेटरों के लिए संदेश है जो टीम से बाहर हैं और दोबारा भारतीय जर्सी पहनने का सपना देख रहे हैं।

मेहनत जारी रखें, खेल को समझें, खुद को बदलें और ऐसा प्रदर्शन करें कि वापसी का दरवाजा खुद खुल जाए—भुवनेश्वर कुमार ने यही करके दिखाया है।

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