
“इतिहास मेरे प्रति अधिक उदार होगा…” — इतिहास ने आखिर इंसाफ कर दिया, लेकिन उसे सुनने के लिए डॉ. मनमोहन सिंह इस दुनिया में नहीं रहे
ओपिनियन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026 कुछ फैसले अदालतें सुनाती हैं, लेकिन कुछ फैसले इतिहास लिखता है। अदालत का फैसला कानून की किताबों में दर्ज होता है, जबकि इतिहास का फैसला लोगों की स्मृति में। दोनों के बीच कई बार वर्षों का फासला होता है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन









