ओपिनियन/ अंतरराष्ट्रीय | मार्क ए. थीसेन (अमेरिकी लेखक) | ABC NATIONAL NEWS | 18 सितंबर 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ रही तकनीकों में शामिल है। इसके फायदे जितने बड़े हैं, इसके संभावित खतरों को लेकर चिंता भी उतनी ही बढ़ रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI का विकास बिना पर्याप्त सुरक्षा के होता रहा तो भविष्य में यह इंसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी लेखक मार्क ए. थीसेन का तर्क है कि AI के डर से इसके विकास को रोक देना अमेरिका के लिए एक अलग तरह का बड़ा खतरा पैदा कर सकता है—खासकर अगर चीन इस दौड़ में तेजी से आगे निकल जाता है।
थीसेन के अनुसार अमेरिका के सामने केवल यह सवाल नहीं है कि AI कितनी शक्तिशाली हो सकती है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर अमेरिका ने AI के विकास पर बहुत ज्यादा रोक लगा दी और चीन ने अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाना जारी रखा, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच तकनीकी अंतर कितना बढ़ सकता है। उनका मानना है कि AI अब केवल नई तकनीक या कारोबार का विषय नहीं है। यह अर्थव्यवस्था, विज्ञान, सुरक्षा और भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ चुकी है।
AI के संभावित खतरे को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है। लेख में पूर्व Anthropic शोधकर्ता Jacob Coxon के बयान का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आशंका जताई थी कि AI इस दशक के अंत तक पूरी मानवता के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। इस तरह की चेतावनियों ने AI के तेजी से विकास को लेकर दुनिया भर में बहस तेज कर दी है।
लेकिन दूसरी ओर Meta के पूर्व मुख्य AI वैज्ञानिक Yann LeCun इस तरह की आशंका को बहुत कम संभावना वाली स्थिति मानते हैं। उनका कहना है कि AI से मानव सभ्यता के खत्म होने की संभावना बेहद कम है। यानी AI को लेकर विशेषज्ञों के बीच इस बात पर स्पष्ट सहमति नहीं है कि भविष्य में इसका खतरा कितना बड़ा हो सकता है।
यही वजह है कि AI को लेकर बहस आसान नहीं है। एक तरफ वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ सुरक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। AI का इस्तेमाल आज स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, कारोबार, उद्योग और कई दूसरे क्षेत्रों में हो रहा है। आने वाले समय में इसका इस्तेमाल और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सवाल यह है कि AI का विकास पूरी तरह रोक दिया जाए या सुरक्षा नियमों के साथ इसे आगे बढ़ाया जाए।
थीसेन के विचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिका और चीन के बीच AI की तकनीकी प्रतिस्पर्धा है। दोनों देशों में AI से जुड़ी कंपनियां, शोध संस्थान, कंप्यूटिंग क्षमता और अत्याधुनिक चिप्स के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। AI के लिए केवल अच्छे सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं होती। इसके लिए शक्तिशाली कंप्यूटर, चिप्स, डेटा और बड़ी तकनीकी क्षमता भी चाहिए। इसलिए AI की दौड़ अब देशों की आर्थिक और तकनीकी ताकत से भी जुड़ती जा रही है।
अगर कोई देश AI के विकास को बहुत धीमा कर देता है और दूसरा देश तेजी से आगे बढ़ता रहता है, तो दोनों के बीच तकनीकी अंतर बढ़ सकता है। यही वह स्थिति है जिसे लेकर थीसेन चिंता जताते हैं। उनके अनुसार AI विकास पर बहुत कठोर रोक लगाने से अमेरिका को चीन के मुकाबले नुकसान हो सकता है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। केवल चीन से आगे निकलने की होड़ में AI की सुरक्षा को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। ज्यादा शक्तिशाली AI सिस्टम के साथ गलत इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा, गलत जानकारी फैलने और मशीनों द्वारा गलत फैसले लिए जाने जैसे सवाल भी सामने आते हैं। इसलिए AI के विकास के साथ उसके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम और सुरक्षा व्यवस्था बनाना भी जरूरी होगा।
असल चुनौती शायद AI को रोकने या बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के बीच चुनाव की नहीं है। चुनौती यह है कि AI तेजी से भी आगे बढ़े और सुरक्षित तरीके से भी। तकनीक के विकास को पूरी तरह रोकना एक रास्ता नहीं हो सकता, लेकिन संभावित खतरों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा।
अमेरिका और चीन की AI प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में दुनिया की तकनीकी दिशा को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इस दौड़ का असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। AI का इस्तेमाल पूरी दुनिया में हो रहा है और इसके नियमों, सुरक्षा तथा विकास को लेकर लिए जाने वाले फैसलों का असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा।
AI का भविष्य केवल इस बात से तय नहीं होगा कि कौन सबसे तेज तकनीक बनाता है। असली सवाल यह होगा कि कौन ऐसी AI विकसित करता है जो शक्तिशाली होने के साथ-साथ सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल की जा सके।



