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नए आपराधिक कानूनों से मिलेगा समयबद्ध न्याय: अमित शाह

औपनिवेशिक दौर के कानूनों की जगह लागू किए गए तीन नए कानूनों को तकनीक आधारित और समयबद्ध न्याय व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताया

राष्ट्रीय/पुडुचेरी/कानून | ABC NATIONAL NEWS | 9 अगस्त 2026

पुडुचेरी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा औपनिवेशिक दौर के आपराधिक कानूनों को हटाकर लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य देश में नागरिकों को अधिक तेज, तकनीक आधारित और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। पुडुचेरी में पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के मैदान में आयोजित राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान समारोह में बोलते हुए शाह ने कहा कि नई आपराधिक न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है।

औपनिवेशिक कानूनों की जगह नई आपराधिक व्यवस्था

अमित शाह ने कहा कि सरकार ने ब्रिटिश शासन के दौर में बनाए गए पुराने आपराधिक कानूनों को बदलकर तीन नए कानून लागू किए हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) शामिल हैं। सरकार के अनुसार इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और नागरिकों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है।

तकनीक और समयबद्ध न्याय पर जोर

गृह मंत्री ने नई व्यवस्था को तकनीक आधारित बताते हुए कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है जिसमें अपराध की जांच से लेकर अदालत में सुनवाई तक की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो।

पुडुचेरी पुलिस को मिला राष्ट्रपति पुलिस कलर

अमित शाह पुडुचेरी पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करने के समारोह में शामिल हुए। यह सम्मान पुलिस बल की दीर्घकालीन सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर योगदान की मान्यता के रूप में दिया जाता है। समारोह में पुलिस बल की परेड भी आयोजित की गई।

गोरिमेडु स्थित पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री ने पुलिसकर्मियों के योगदान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

नए कानूनों की असली कसौटी लागू होने के बाद

नए आपराधिक कानूनों को लेकर सरकार ने तेज और तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इन कानूनों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि आम नागरिक को न्याय कितनी जल्दी मिलता है, जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है तथा पुलिस और न्यायिक तंत्र में तकनीक का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर कितना कारगर साबित होता है।

सरकार नए कानूनों को न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बता रही है। अब चुनौती इस बदलाव को कानून की किताब से निकालकर थाने, जांच एजेंसी और अदालत तक प्रभावी ढंग से लागू करने की है।

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