राष्ट्रीय/झारखंड/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | 9 अगस्त 2026
रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और JPSC-JSSC में व्यापक सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को छठे दौर की बातचीत हुई, लेकिन करीब एक घंटे चली बैठक के बाद भी कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। बातचीत के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों पर कायम रहने का संकेत दिया है। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और यदि उनकी मांगों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त को बड़े पैमाने पर विधानसभा घेराव किया जाएगा।
सरकार से फिर बातचीत, लेकिन समाधान दूर
रविवार को JPSC-JSSC Reforms Manch के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार की समिति के साथ बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष, रविंद्र रवि, पंकज साहा, राजेश प्रसाद, शशांक और आनंद शामिल रहे। छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना, कथित अनियमितताओं की जांच कराना और भर्ती व्यवस्था में जरूरी सुधार लागू करना है। इससे पहले शुक्रवार को भी सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन उस बैठक से कोई निर्णायक परिणाम नहीं निकला था। रविवार की बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सामने आने तक आंदोलन जारी रहेगा।
‘आंदोलन को बांटने की कोशिश’ का आरोप
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने सरकार पर आंदोलन को अलग-अलग गुटों में बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार ने मुख्य आंदोलनकारी संगठनों के साथ बातचीत के बजाय अलग-अलग छात्र संगठनों से ज्ञापन लेकर आंदोलन की एकजुटता को कमजोर करने की कोशिश की है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की इस रणनीति को राजनीतिक कवायद बताते हुए कहा कि छात्रों की मुख्य मांगें पहले से स्पष्ट हैं और उन्हें अलग-अलग संगठनों के ज्ञापन के जरिए उलझाने की जरूरत नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से अलग-अलग संगठनों से संवाद को सभी पक्षों की मांगें समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
छात्रों की सेहत पर बढ़ी चिंता
लंबे आंदोलन के बीच अनशन पर बैठे छात्रों की सेहत अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत शनिवार रात अचानक बिगड़ गई। चिकित्सकों के मुताबिक उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर 53 तक पहुंच गया था। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना अनशन और प्रदर्शन जारी रखा है। रविवार को चिकित्सकों की एक टीम ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर अनशन कर रहे छात्रों की स्वास्थ्य जांच की। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ छात्रों के वजन में कमी आई है, हालांकि उस समय वे सतर्क और स्थिर बताए गए। छात्रों ने अस्पताल में भर्ती होने से इनकार किया है।
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग सबसे प्रमुख
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI से जांच कराने, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। छात्र उन परीक्षाओं की भी समीक्षा चाहते हैं, जिन्हें TSR Data Processing Private Limited जैसी एजेंसियों के माध्यम से कराया गया है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना युवाओं का भरोसा बहाल नहीं किया जा सकता।
व्हिसलब्लोअर की बहाली भी एजेंडे में
छात्रों ने वित्त विभाग के सेक्शन अधिकारी और कथित व्हिसलब्लोअर संतोष कुमार मस्ताना के निलंबन को वापस लेने तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई है। मस्ताना को 2025 में JSSC-CGL परीक्षा में पेपर लीक से जुड़ा कथित ‘फर्जी नैरेटिव’ फैलाने के आरोप में CID ने गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिली। आंदोलनकारी उन्हें भर्ती परीक्षा से जुड़े सवाल उठाने वाले व्हिसलब्लोअर के रूप में देखते हैं और उनकी कार्रवाई की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी
बातचीत के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं के मुताबिक राज्य के अलग-अलग जिलों से छात्र रांची पहुंच रहे हैं। हजारीबाग, पलामू और लातेहार सहित कई जिलों से छात्रों के आंदोलन में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सोमवार का प्रदर्शन सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।
राजनीतिक समर्थन भी बढ़ा
छात्र आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू और पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल रविवार को प्रदर्शन स्थल पहुंचे और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। संजय सेठ ने कहा कि मुख्यमंत्री को आंदोलन के शुरुआती दौर में ही छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने परीक्षा रद्द करने और कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग का समर्थन किया।
वहीं डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख जयराम महतो ने भी छात्रों के समर्थन में पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का अनशन किया। इससे आंदोलन का राजनीतिक दायरा और व्यापक होता दिखाई दे रहा है।
आंदोलन का तरीका भी बदला, कविता और व्यंग्य से विरोध
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्र सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं हैं। प्रदर्शन में व्यंग्यात्मक पोस्टर, कथित ‘जॉब रेट कार्ड’, कविता और महाभारत के संदर्भों के जरिए भी भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वर्षों तक परीक्षा और नियुक्ति का इंतजार करने वाले युवाओं की परेशानी को केवल प्रशासनिक आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। यह उनके करियर, परिवार और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
अब सरकार के सामने निर्णायक फैसला लेने का दबाव
झारखंड का छात्र आंदोलन अब केवल एक परीक्षा को लेकर विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, लंबित परीक्षाओं, पारदर्शिता, जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर छात्रों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। सरकार लगातार बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश कर रही है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए।
अब निगाहें 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर हैं। एक तरफ सरकार संवाद के जरिए आंदोलन को शांत करने की कोशिश में है, दूसरी तरफ छात्र अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अनशन पर बैठे छात्रों की बिगड़ती सेहत और बढ़ता जनसमर्थन इस आंदोलन को और गंभीर बना रहा है। आने वाला दिन तय करेगा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत समाधान तक पहुंचती है या झारखंड का यह भर्ती आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।




