Home » National » पश्चिम बंगाल में यूसीसी की तैयारी तेज, मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति

पश्चिम बंगाल में यूसीसी की तैयारी तेज, मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति

राष्ट्रीय/ पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 3 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को राज्य मंत्रिमंडल ने यूसीसी के मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दे दी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य सरकार का कहना है कि समिति प्रस्तावित कानून के सभी संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेगी और चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

सरकार के अनुसार, समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक संविधान के प्रावधानों, विभिन्न समुदायों के अधिकारों और न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप हो। समिति कानून के मसौदे का बारीकी से परीक्षण करेगी और आवश्यक संशोधनों या सुझावों के साथ अपनी सिफारिशें देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया पर निर्णय लेगी।

पश्चिम बंगाल सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस लगातार तेज बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में यूसीसी को लेकर राजनीतिक दलों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक समुदायों के बीच व्यापक चर्चा होती रही है। एक पक्ष इसे संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित समान नागरिक संहिता के सिद्धांत को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ा संवेदनशील विषय बताता है।

यूसीसी का मूल उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकार जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी के समर्थकों का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू होने से सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित होगा। वहीं विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि इस तरह का कानून धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावित कर सकता है, इसलिए व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति केवल मसौदा विधेयक की समीक्षा करेगी और अपनी स्वतंत्र सिफारिशें देगी। समिति विभिन्न कानूनी प्रावधानों, न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों तथा संभावित सामाजिक प्रभावों का भी अध्ययन करेगी। जरूरत पड़ने पर विभिन्न विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से भी राय ली जा सकती है।

देश में इससे पहले भी यूसीसी को लेकर कई राज्यों ने पहल की है। इस विषय पर न्यायपालिका और विधि आयोग के स्तर पर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। अब पश्चिम बंगाल में समिति के गठन को इस बहस का एक नया चरण माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले उसके सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं का गहन अध्ययन आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई जैसी अनुभवी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। समिति की सिफारिशें यह तय करने में मदद करेंगी कि प्रस्तावित मसौदे में किन प्रावधानों को बनाए रखा जाए, किनमें संशोधन किया जाए और किन विषयों पर और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

फिलहाल समिति को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर मसौदा विधेयक में संशोधन कर आगे की संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया शुरू कर सकती है। ऐसे में आने वाले सप्ताहों में यूसीसी को लेकर पश्चिम बंगाल की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक और कानूनी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बनी रह सकती है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted