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कक्षा 9 में अब बच्चे सीखेंगे इनकम टैक्स का हिसाब, NCERT की नई किताब में नया टैक्स रिजीम

शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

स्कूल की पढ़ाई में बच्चों को अब सिर्फ इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत वित्त और टैक्स की बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में पहली बार छात्रों को नई टैक्स व्यवस्था के तहत आयकर देनदारी की गणना करना सिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य कम उम्र से ही विद्यार्थियों को पैसों के प्रबंधन, बचत, निवेश और कर व्यवस्था की बुनियादी समझ देना है।

नई सामाजिक विज्ञान की किताब में शामिल किया गया वित्तीय अध्याय

NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond – Part Two’ में ‘Managing Your Personal Finances’ नाम से एक पूरा अध्याय शामिल किया गया है। इसी अध्याय के तहत छात्रों को व्यक्तिगत वित्त से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। इसमें आय, खर्च, बचत और निवेश के साथ-साथ टैक्स देनदारी को समझने की प्रक्रिया भी शामिल है।

इस बदलाव के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि कमाई होने के बाद व्यक्ति अपने पैसे को किस तरह व्यवस्थित करता है और सरकार को दिए जाने वाले आयकर की गणना किस प्रकार की जाती है। कक्षा 9 के स्तर पर इस तरह की जानकारी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना स्कूली शिक्षा में वित्तीय साक्षरता को अधिक महत्व दिए जाने की दिशा में एक बदलाव है।

पहली बार स्कूली स्तर पर नई टैक्स व्यवस्था की गणना

नई किताब में छात्रों को नई आयकर व्यवस्था के तहत टैक्स देनदारी की गणना से परिचित कराया जाएगा। यानी विद्यार्थी किसी व्यक्ति की आय के आधार पर यह समझने की कोशिश करेंगे कि उसकी कर योग्य आय कितनी है और उस पर संभावित टैक्स देनदारी कैसे निकाली जाती है।

यह विषय केवल टैक्स की जानकारी तक सीमित नहीं है। किताब का पूरा अध्याय छात्रों को व्यक्तिगत वित्तीय फैसलों की बुनियादी समझ देने के लिए तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि किसी व्यक्ति के पास उपलब्ध धन को केवल खर्च करने के बजाय बचत और निवेश के माध्यम से भविष्य के लिए कैसे व्यवस्थित किया जा सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट से लेकर म्यूचुअल फंड और शेयर तक

कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अब अलग-अलग निवेश विकल्पों के बारे में भी बताया जाएगा। किताब में फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और इक्विटी स्टॉक जैसे निवेश माध्यमों को शामिल किया गया है।

इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि निवेश के अलग-अलग साधनों की प्रकृति क्या होती है और पैसे को अलग-अलग विकल्पों में लगाने से जुड़े बुनियादी पहलू क्या हैं। इससे बच्चों को भविष्य में वित्तीय फैसले लेते समय बचत, निवेश और जोखिम जैसी अवधारणाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

कम उम्र में वित्तीय समझ विकसित करने पर जोर

आज के समय में बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, निवेश, लोन और टैक्स जैसी चीजें आम जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में नई किताब में व्यक्तिगत वित्त से जुड़े विषयों को शामिल करने से विद्यार्थियों को रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

कक्षा 9 के छात्रों को टैक्स की गणना और निवेश विकल्पों की जानकारी देने का मतलब यह नहीं है कि उनसे वास्तविक आयकर रिटर्न भरने की अपेक्षा होगी। बल्कि पाठ्यक्रम का फोकस इन अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने और वित्तीय साक्षरता की बुनियाद तैयार करने पर है।

शिक्षा में बदलती जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम

NCERT की नई किताब में व्यक्तिगत वित्त को शामिल किया जाना स्कूली पाठ्यक्रम में व्यावहारिक जीवन से जुड़े विषयों को जगह देने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। अब छात्र किताबों में केवल अर्थव्यवस्था के सिद्धांत नहीं पढ़ेंगे, बल्कि अपनी व्यक्तिगत आर्थिक जिंदगी से जुड़े उदाहरणों के जरिए कमाई, खर्च, बचत, निवेश और टैक्स जैसी अवधारणाओं को भी समझेंगे।

इस तरह कक्षा 9 से ही विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन कैसे किया जाता है और किसी व्यक्ति की आर्थिक योजना में टैक्स और निवेश की क्या भूमिका होती है।

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