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ट्रंप की करीबी लॉरा लूमर का भड़काऊ बयान, खामेनेई के जनाज़े पर हमले के लिए इज़रायल को उकसाया

अंतरराष्ट्रीय | अमेरिका–ईरान–इज़रायल | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 2 जुलाई 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी मानी जाने वाली दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लॉरा लूमर एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान इज़रायल को हमला करने के लिए उकसाने वाला बयान दिया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

लूमर ने सोशल मीडिया पर खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी एक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खामेनेई का अंतिम संस्कार? इसे हम ‘टारगेट रिच एनवायरमेंट’ कहते हैं।” इसके साथ उन्होंने बम का इमोजी भी लगाया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “आईडीएफ (इज़रायली सेना) के पास सबसे बड़ा मौका है।”

विवाद यहीं नहीं रुका। एक अन्य प्रतिक्रिया में लॉरा लूमर ने कहा, “मैं कभी भी अमेरिका या इज़रायली सेना को जिहादियों पर बम बरसाते देखने के मौके को मना नहीं करूंगी।” उनके इन बयानों को कई लोगों ने खुले तौर पर हिंसा भड़काने वाला और बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।

लॉरा लूमर लंबे समय से इस्लाम विरोधी बयानों के लिए जानी जाती रही हैं। वह ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत, युद्धविराम या समझौते का लगातार विरोध करती रही हैं। उन्होंने पहले भी ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ वार्ता की कोशिशों की आलोचना की थी और कई अमेरिकी नेताओं तथा पत्रकारों पर भी तीखे व्यक्तिगत हमले किए हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल के महीनों में हुए सैन्य संघर्ष के बाद तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच हाल ही में 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है, जिसके बाद हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं, लेकिन क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार, आयतुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 6, 7 और 9 जुलाई को तेहरान, क़ुम और मशहद में आयोजित किया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अंतिम विदाई समारोह में दो करोड़ से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है।

हालांकि, लॉरा लूमर के बयान पर अमेरिका या इज़रायल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन उनके बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों या उनके करीबी लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए उकसाऊ बयान अंतरराष्ट्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं।

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