इन्फ्रास्ट्रक्चर/ चेन्नई/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 15 जून 2026
चेन्नई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रेलवे बोर्ड अगले 4 से 6 सप्ताह के भीतर चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) को मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) नेटवर्क सौंपने की मंजूरी दे सकता है। वर्षों से लंबित यह परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, दक्षिण रेलवे और तमिलनाडु सरकार की ओर से संयुक्त प्रस्ताव हाल ही में रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। बोर्ड की मंजूरी मिलते ही दक्षिण रेलवे और राज्य सरकार के बीच औपचारिक समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसके बाद MRTS का संचालन और आधुनिकीकरण CMRL के हाथों में चला जाएगा।
यह परियोजना पिछले कई वर्षों से चर्चा में रही है। जुलाई 2025 में रेलवे बोर्ड ने MRTS को CMRL के साथ ट्रांसफर और मर्ज करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। अब अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है।
परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹4,500 करोड़ बताई जा रही है। इस राशि का उपयोग MRTS कॉरिडोर के व्यापक आधुनिकीकरण, स्टेशनों के पुनर्विकास, सुरक्षा व्यवस्था के उन्नयन, बेहतर कनेक्टिविटी और मेट्रो नेटवर्क के साथ पूर्ण एकीकरण के लिए किया जाएगा।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि MRTS के मेट्रो नेटवर्क में शामिल होने से चेन्नई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कहीं अधिक प्रभावी और यात्री-अनुकूल बनेगी। लंबे समय से कम यात्री संख्या, रखरखाव की समस्याओं और संचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे MRTS को नई पहचान मिल सकती है।
राज्य सरकार फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। फंडिंग की व्यवस्था तय होने के बाद पुनर्विकास और एकीकरण का काम तेज़ी से आगे बढ़ाया जाएगा।
यदि रेलवे बोर्ड निर्धारित समयसीमा में मंजूरी दे देता है, तो चेन्नई की परिवहन व्यवस्था में यह पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जाएगा। इससे लाखों दैनिक यात्रियों को बेहतर सुविधा, तेज़ कनेक्टिविटी और आधुनिक शहरी परिवहन का लाभ मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि MRTS और मेट्रो का एकीकरण चेन्नई को देश के सबसे बेहतर एकीकृत शहरी परिवहन नेटवर्क वाले शहरों में शामिल कर सकता है।




