राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 19 जून 2026
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांग खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर तीखे सवाल उठाए हैं। खड़गे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में कोई भी संस्था संविधान और कानून से ऊपर नहीं हो सकती, चाहे वह राजनीतिक दल हो, सामाजिक संगठन हो या फिर RSS जैसा प्रभावशाली संगठन।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियांग खड़गे ने कहा कि यदि RSS कर्नाटक या देश में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक अथवा आर्थिक गतिविधियां संचालित करना चाहता है तो उसे पहले अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “चाहे हम हों या RSS, काम तो संविधान के दायरे में ही करना पड़ेगा। अगर आप सामाजिक कार्य कर रहे हैं, सांस्कृतिक गतिविधियां चला रहे हैं या किसी भी प्रकार की सार्वजनिक भूमिका निभा रहे हैं, तो पहले पंजीकरण कराइए और बताइए कि आप कौन हैं।”
खड़गे ने RSS की वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके पास आने वाला धन कहां से आता है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है। उन्होंने कहा, “बताइए कि पैसा कहां से आता है? आखिर आपका काम दान और चंदे पर ही चलता है न? जब देश के अन्य ट्रस्ट, एनजीओ और सामाजिक संगठन अपने वित्तीय रिकॉर्ड और गतिविधियों का विवरण सार्वजनिक करते हैं, तो RSS के लिए अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए?”
कांग्रेस नेता के इस बयान ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है जो पिछले कुछ समय से RSS की कानूनी संरचना और जवाबदेही को लेकर चल रही है। विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि देश के सार्वजनिक जीवन में इतनी व्यापक भूमिका निभाने वाले संगठन की प्रशासनिक और वित्तीय संरचना के बारे में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही किसी संस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता का आधार होती है। उनका तर्क है कि यदि कोई संगठन लाखों लोगों को प्रभावित करता है, हजारों संस्थानों से जुड़ा है और सार्वजनिक नीति तथा सामाजिक विमर्श पर प्रभाव डालता है, तो उससे सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है।
हालांकि RSS और उसके समर्थक पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते रहे हैं। उनका कहना है कि संघ एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, उसकी शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं और उसकी गतिविधियां सार्वजनिक हैं। संघ का दावा रहा है कि वह समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगा हुआ है तथा उसके खिलाफ लगाए जाने वाले आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होते हैं।
लेकिन प्रियांग खड़गे का कहना है कि मुद्दा विचारधारा का नहीं, बल्कि समान कानून और समान जवाबदेही का है। उन्होंने कहा कि जब देश का एक सामान्य संगठन भी नियामक नियमों, ऑडिट और पंजीकरण प्रक्रियाओं का पालन करता है तो किसी भी बड़े संगठन को इससे छूट नहीं मिलनी चाहिए।
कर्नाटक में यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। ऐसे में संघ की भूमिका, प्रभाव और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल प्रियांग खड़गे के बयान ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश के सभी संगठनों के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता के मानदंड समान होने चाहिए, या कुछ संस्थाओं को विशेष छूट मिलनी चाहिए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




