[the_ad id="179"]
Home » Politics » ट्रंप की तारीफ नहीं, भारत की वैश्विक स्थिति पर सवाल उठाने का समय: पवन खेड़ा

ट्रंप की तारीफ नहीं, भारत की वैश्विक स्थिति पर सवाल उठाने का समय: पवन खेड़ा

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 जून 2026

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रशंसा को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है।

पवन खेड़ा ने कहा कि जी-7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ किए जाने के बावजूद हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो भारत की वैश्विक स्थिति और सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा जारी एक मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दर्शाया गया, लेकिन भारत सरकार की ओर से अपेक्षित स्तर की कड़ी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिका ने रोजगार आधारित वीजा श्रेणियों में भारतीय पेशेवरों के लिए नई बाधाएं खड़ी की हैं। जुलाई 2026 के वीजा बुलेटिन में भारतीयों के लिए कई श्रेणियों को सीमित या अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे हजारों भारतीय परिवारों की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके अलावा भारतीय नागरिकों को हथकड़ियों में बांधकर निर्वासित किए जाने, भारतीय नाविकों की मौत और भारत के खिलाफ व्यापारिक दबाव जैसी घटनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।

पवन खेड़ा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति व्यक्तिगत मित्रता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के आधार पर चलती है। किसी विदेशी नेता की सार्वजनिक प्रशंसा को कूटनीतिक उपलब्धि मान लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह देश के नागरिकों, सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा कितनी मजबूती से कर पाती है।

कांग्रेस नेता के अनुसार यदि भारत स्वयं को उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता भी दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि विदेश नीति का आकलन फोटो अवसरों, सार्वजनिक प्रशंसाओं या कूटनीतिक शिष्टाचार से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों से किया जाना चाहिए।

पवन खेड़ा ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार विदेश नीति के प्रचार से आगे बढ़कर उसके वास्तविक परिणामों पर जवाब दे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारत की वैश्विक स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है, तो फिर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं जो देश की रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति को चुनौती देती हैं।

उन्होंने कहा कि किसी विदेशी नेता की तारीफ से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दुनिया भारत के हितों, उसकी संप्रभुता और उसके नागरिकों के सम्मान को कितनी गंभीरता से लेती है। यही किसी भी सफल विदेश नीति की वास्तविक कसौटी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *