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देश में सिर्फ वित्तीय नहीं, भरोसे का भी संकट: सोनम वांगचुक

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 15 जून 2026

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि देश इस समय केवल वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) का नहीं बल्कि “भरोसे के गंभीर संकट” (Trust Deficit) का भी सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जवाबदेही, पारदर्शिता और स्वतंत्र मीडिया सुनिश्चित नहीं कर सकती तो उसे स्पष्ट रूप से घोषित कर देना चाहिए कि भारत अब लोकतंत्र नहीं बल्कि एक सर्वसत्तावादी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

वांगचुक यह टिप्पणी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में कर रहे थे। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। कार्यक्रम में अभिनेता प्रकाश राज, अभिनेता किरण श्रीनिवास तथा फिल्मकार सेनानी हेगड़े और कृपाकर बी.एस. सहित कई चर्चित हस्तियां मौजूद रहीं।

अपने संबोधन में वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। यदि नागरिकों का भरोसा सरकार, संस्थाओं और मीडिया से उठने लगे तो केवल आर्थिक विकास के आंकड़े देश को मजबूत नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि सरकार को आलोचना से डरने के बजाय जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करना चाहिए।

वांगचुक ने स्वतंत्र प्रेस की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि सत्ता से सवाल पूछने वाली संस्था भी है। यदि स्वतंत्र पत्रकारिता कमजोर होती है तो लोकतांत्रिक ढांचा भी कमजोर पड़ता है।

फ्रीडम पार्क में हुए इस प्रदर्शन को हाल के महीनों में नागरिक अधिकारों, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती को लेकर बढ़ती चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अधिक जवाबदेही, संस्थागत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक की यह टिप्पणी केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र, शासन और नागरिक विश्वास को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। विशेष रूप से युवाओं और नागरिक समाज के बीच इन मुद्दों को लेकर बढ़ती चर्चा आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।

बारिश के बीच हुए इस प्रदर्शन ने यह भी संकेत दिया कि लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही जैसे मुद्दे अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागरिक समाज के बड़े वर्ग की चिंता का विषय बन चुके हैं।

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