अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ला पाज़ | 20 जून 2026
दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में राजनीतिक और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। लगातार 50 दिनों से जारी सड़क नाकेबंदी, हिंसक प्रदर्शनों और आर्थिक गतिविधियों के ठप पड़ जाने के बाद राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। इस फैसले के साथ ही सरकार को सेना की व्यापक तैनाती का अधिकार मिल गया है, जिससे सड़कों को खाली कराने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए सैन्य कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।
राष्ट्रपति पाज़ ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है और सरकार के सामने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तथा आम नागरिकों के जीवन को सामान्य बनाने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि लगातार जारी अवरोधों और हिंसा ने परिवहन, व्यापार, खाद्य आपूर्ति और ईंधन वितरण को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार को कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि आपातकाल की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही सरकार ने देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन, बोलिवियन वर्कर्स कन्फेडरेशन (COB), के साथ एक समझौते का ऐलान किया था। माना जा रहा था कि इस समझौते से तनाव कम होगा और आंदोलनकारी सड़कें खाली कर देंगे। लेकिन हालात सामान्य नहीं होने और कई इलाकों में नाकेबंदी जारी रहने के बाद सरकार ने आपातकाल लागू करने का निर्णय लिया।
पिछले डेढ़ महीने से बोलिविया के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनकारी महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन संकट और आर्थिक नीतियों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। अनेक प्रमुख राजमार्गों और परिवहन मार्गों को बंद कर दिया गया है, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। उद्योग, कृषि और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हुई है।
आपातकाल की घोषणा के बाद राजधानी ला पाज़ सहित कई प्रमुख शहरों में सेना और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। सरकार का कहना है कि सैन्य बलों की तैनाती का उद्देश्य केवल सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार को राजनीतिक संवाद और लोकतांत्रिक समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि सैन्य हस्तक्षेप को।
विश्लेषकों का मानना है कि बोलिविया इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी समूहों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो स्थिति और जटिल हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि राष्ट्रीय हित और आर्थिक स्थिरता को देखते हुए कानून-व्यवस्था बहाल करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आपातकाल लागू होने के बाद बोलिविया में हालात सामान्य होते हैं या फिर राजनीतिक टकराव और अधिक बढ़ जाता है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत की दिशा ही तय करेगी कि देश संकट से बाहर निकल पाता है या नहीं।




