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“अब समाजवादी पार्टी की बारी है”: ओम प्रकाश राजभर का बड़ा दावा, महिला आरक्षण बिल के समर्थन में टूटेगा सपा का एक बड़ा धड़ा

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | अंबेडकरनगर | 20 जून 2026

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। अंबेडकरनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि देश की कई प्रमुख विपक्षी पार्टियों में जो टूट और बिखराव देखने को मिल रहा है, उसके पीछे महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनाया गया रुख एक महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने दावा किया कि अब समाजवादी पार्टी के भीतर भी एक बड़ा धड़ा अलग रास्ता चुन सकता है और वह महिला आरक्षण के समर्थन के साथ नई राजनीतिक दिशा तय करेगा।

राजभर ने कहा कि देश ने देखा है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया, तब कई विपक्षी दलों ने उसका विरोध किया। उनके अनुसार तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के भीतर इस मुद्दे को लेकर गंभीर मतभेद पैदा हुए, जिसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के भीतर मौजूद कई नेता और जनप्रतिनिधि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जनता के खिलाफ खड़े होने का जोखिम नहीं लेना चाहते।

“तृणमूल और शिवसेना के बाद अब सपा की बारी”

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर डालें तो कई दलों में असंतोष और टूट दिखाई दे रही है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में चल रहे संकट और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर पैदा हुई बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि अब समाजवादी पार्टी में भी इसी तरह की स्थिति बनने जा रही है।

राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का एक बड़ा वर्ग महिला आरक्षण बिल के समर्थन में है और भविष्य में वही समूह अलग राजनीतिक पहचान बनाने का फैसला कर सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह राजनीतिक बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा देगा।

महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति नहीं चलेगी: राजभर

एसबीएसपी प्रमुख ने कहा कि आज देश की महिलाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक और राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के मुद्दे की अनदेखी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी देने का आंदोलन है।

राजभर के अनुसार कई सांसद और विधायक निजी तौर पर महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन पार्टी लाइन के कारण खुलकर अपनी राय नहीं रख पाते। यही कारण है कि विभिन्न दलों के भीतर वैचारिक टकराव बढ़ रहा है।

सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चाएं

ओम प्रकाश राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में विपक्षी दल आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की बगावत, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरा संकट और विपक्षी गठबंधन की बदलती राजनीति के बीच राजभर का दावा राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से राजभर के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके लगातार बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि क्या राजभर की भविष्यवाणी महज राजनीतिक बयानबाजी साबित होगी या आने वाले महीनों में समाजवादी पार्टी के भीतर वास्तव में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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