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हॉर्मुज खुलते ही भारत को बड़ी राहत! सस्ता हो सकता है तेल, घट सकता है महंगाई का दबाव

अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जून 2026

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की संभावना ने भारत के लिए बड़ी आर्थिक राहत की उम्मीद जगाई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य नौवहन बहाल होने से भारत की तेल आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हो सकती हैं, मालभाड़ा घट सकता है और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित वह रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जिससे होकर दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों का अधिकांश तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है। यही देश भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं।

पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हॉर्मुज में बढ़े तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी। जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम बढ़ गए थे, मालभाड़ा महंगा हो गया था और तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ रहा था।

अब जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा हुई है और 19 जून को औपचारिक हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है, तो बाजारों ने राहत की प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज पूरी तरह सामान्य रूप से खुल जाता है तो भारत के लिए ऊर्जा आयात की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में थोड़ी सी कमी भी देश के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत पर दबाव कम होगा, परिवहन खर्च घटेगा और खाद्य वस्तुओं समेत कई क्षेत्रों में महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि स्थिति तुरंत सामान्य नहीं होगी। युद्ध के दौरान फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को पूरी तरह दूर होने में कई महीने लग सकते हैं। इसलिए तेल बाजार में स्थायी राहत आने में समय लग सकता है।

इसके बावजूद आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पश्चिम एशिया में स्थिरता कायम रहती है तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और महंगाई नियंत्रण के मोर्चे पर बड़ा लाभ मिल सकता है।

तीन महीने तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते ऊर्जा संकट के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि हॉर्मुज का रास्ता खुलने से दुनिया की तेल आपूर्ति सामान्य होगी और भारत समेत कई देशों को राहत मिलेगी।

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