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‘युवाओं में प्रेस के सामने खड़े होने का साहस, PM और अमित शाह में नहीं’—NEET प्रदर्शनकारियों से मिले राहुल गांधी, 20 जुलाई की कार्रवाई पर सरकार को घेरा

CJP आंदोलन में शामिल युवाओं ने राहुल के सामने सुनाई लाठीचार्ज, बदसलूकी, हिरासत और उत्पीड़न की आपबीती; राहुल बोले—‘खराब शिक्षा व्यवस्था की शिकायत करना अपराध नहीं, इन युवाओं ने संविधान और भारत के भविष्य की रक्षा की है’

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अगस्त 2026

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP के आंदोलन में शामिल रहे युवाओं से मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी के सामने 20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज, हिरासत, धमकी, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और बाद में सोशल मीडिया ट्रोलिंग तथा उत्पीड़न की आपबीती सुनाई। युवाओं की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि ये युवा भारतीय प्रेस के सामने खड़े होकर अपने अनुभव बताने का साहस दिखा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री में यहां आकर खड़े होने का साहस नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को किसी से माफी मांगने की जरूरत से भी इनकार किया और कहा कि दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर सवाल उठाना कोई अपराध नहीं है।

‘युवा प्रेस के सामने खड़े हैं, लेकिन PM और गृह मंत्री में यहां खड़े होने का साहस नहीं’

राहुल गांधी ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “युवा भारतीय प्रेस के सामने खड़े हैं, लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री में यहां खड़े होने का साहस नहीं है।” राहुल ने इसे केवल NEET या किसी एक परीक्षा का मुद्दा मानने से इनकार करते हुए सरकार की जवाबदेही से जोड़ा। उनका कहना था कि जब देश के युवा सार्वजनिक रूप से सामने आकर मारपीट, धमकी और उत्पीड़न के अनुभव बता सकते हैं, तो सत्ता में बैठे लोगों को भी सामने आकर उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। राहुल की टिप्पणी ने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को एक बार फिर सीधे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

‘इन युवाओं ने संविधान और भारत के भविष्य की रक्षा की’

प्रदर्शनकारियों से बातचीत के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उनकी युवाओं के साथ खुली और स्पष्ट बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और परेशान किया गया। राहुल ने कहा कि उन्हें इन युवाओं और उनके साथ आंदोलन में शामिल हजारों भारतीय युवाओं पर गर्व है। उनके मुताबिक इन छात्रों ने केवल अपनी परीक्षा या नौकरी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि “संविधान, भारत की अवधारणा और देश के भविष्य की रक्षा” के लिए आवाज उठाई। राहुल ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में खामियां हैं और वह युवाओं की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है तो उसकी शिकायत करना अपराध नहीं हो सकता; व्यवस्था को सुधारना सरकार की जिम्मेदारी है।

‘हमें बेहतर शिक्षा व्यवस्था चाहिए, पेपर लीक खत्म होना चाहिए’

राहुल गांधी ने आंदोलन के मूल मुद्दे को दोहराते हुए कहा कि देश को बेहतर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक का अंत और युवाओं के लिए सुरक्षित भविष्य चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में खामी की शिकायत करने वाले युवाओं को निशाना बनाने के बजाय उन खामियों को ठीक किया जाना चाहिए जिनके कारण वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। राहुल ने साफ कहा कि प्रदर्शनकारी युवाओं ने कुछ गलत नहीं किया और उन्हें किसी से माफी मांगने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के घरों तक लोगों को भेजकर दबाव बनाने की शिकायतों को भी “पूरी तरह बेतुका” करार दिया।

मुस्कान का सवाल—‘मैं शांति से चल रही थी तो मुझे क्यों मारा?’

राहुल गांधी के सामने मुस्कान शर्मा ने 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मुस्कान ने कहा, “जब मैं शांति से चल रही थी तो पुलिस ने मुझे क्यों मारा?” उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुरुष RAF अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की और डंडे से बेहद आपत्तिजनक तरीके से हमला करने की कोशिश की। मुस्कान ने सवाल उठाया कि महिला प्रदर्शनकारी के साथ एक पुरुष अधिकारी ने ऐसा व्यवहार कैसे किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले अधिकारी या उसे आदेश देने वाला व्यक्ति यदि माफी मांगता है तो उन्हें खुशी होगी। आरोप गंभीर हैं और संबंधित सुरक्षा बल का पक्ष तथा स्वतंत्र जांच ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट कर सकती है।

फराह नाज़ बोलीं—‘हमें हिरासत में रखा और देशद्रोही कहा गया’

फराह नाज़ ने राहुल गांधी को बताया कि 20 जुलाई को वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उसी दौरान पुलिस ने कथित तौर पर लाठीचार्ज किया। फराह ने आरोप लगाया कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखा गया और उन्हें “देशद्रोही” तक कहा गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे देश और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना बंद नहीं करेंगी। उनका कहना था कि लोग उनके बारे में कुछ भी सोचें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का उनका संकल्प नहीं बदलेगा।

‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा तो इतनी बर्बरता’—भारत बनाईत

भारत बनाईत ने कथित कार्रवाई पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आंदोलनकारी तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे और इस मांग पर उनके साथ इतनी कठोरता बरती गई। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर अमित शाह का इस्तीफा मांग लिया होता, तो शायद गोली मार दी जाती।” यह भारत बनाईत की राजनीतिक टिप्पणी और आशंका थी, न कि किसी गोली चलाने के आदेश का तथ्यात्मक दावा। लेकिन उनका बयान उस गुस्से और भय को सामने लाता है जिसे प्रदर्शनकारी 20 जुलाई की घटनाओं से जोड़ रहे हैं।

नूतन टोप्पो का दावा—‘पैलेट गन हमारी तरफ थी, फायर हुआ और मुझे चोट लगी’

नूतन टोप्पो ने राहुल गांधी के सामने दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों की दिशा में पैलेट गन तैनात देखी थी। उनके मुताबिक पीछे मुड़ते ही फायर हुआ और वह घायल हो गईं। नूतन ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें अन्याय के खिलाफ लड़ने से पीछे नहीं हटाया है और भविष्य में भी जब मौका मिलेगा, वह आवाज उठाएंगी। पैलेट गन के इस्तेमाल का यह दावा बेहद गंभीर है और इसकी पुष्टि के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड, पुलिस का पक्ष तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।

रिया अहीर का आरोप—‘27 जुलाई को शिकायत दी, 5 अगस्त तक FIR नहीं’

रिया अहीर ने कहा कि वह वही युवती हैं जिन्होंने मुंबई में पुलिस वैन को रोका था। उनका दावा है कि उन्होंने करीब 20 युवाओं को कथित गैरकानूनी हिरासत से बचाने की कोशिश की थी और इसके बाद उनके खिलाफ अलग-अलग नैरेटिव चलाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। रिया ने कहा कि उन्होंने 27 जुलाई को पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन 5 अगस्त तक FIR दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जिस समय वह दूसरे युवाओं के लिए खड़ी हुई थीं, आज वही युवा उनके समर्थन में खड़े हैं और यही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है।

राहुल का अमित शाह पर हमला—‘नहीं जानते थे तो अक्षम, आदेश दिया तो जवाबदेह’

राहुल गांधी ने 20 जुलाई की कथित हिंसा की राजनीतिक जिम्मेदारी सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर डालते हुए दो संभावनाएं रखीं। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री को पता ही नहीं था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जा रही है तो यह उनकी अक्षमता का प्रश्न है; और यदि कार्रवाई उनके आदेश पर हुई तो उनकी जवाबदेही बनती है। राहुल ने कहा कि दोनों परिस्थितियों में गृह मंत्री जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है और इस पर गृह मंत्रालय तथा संबंधित पुलिस बल का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

‘अन्याय किसी के साथ हो, नागरिक को उसके लिए खड़ा होना चाहिए’

राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद कहा कि ये युवा अलग-अलग राज्यों से आए हैं, लेकिन उनकी लड़ाई एक साझा प्रश्न पर है—देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता। उन्होंने युवाओं के हवाले से कहा कि अन्याय चाहे किसी के साथ हो, एक नागरिक के रूप में दूसरे व्यक्ति की रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए। राहुल ने कहा कि इन प्रदर्शनकारियों ने हिंसा नहीं की, फिर भी वे कथित तौर पर धमकी और harassment का सामना कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग करना कोई गलती नहीं है।

‘माफी किस बात की?’—राहुल ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खींची स्पष्ट लकीर

राहुल गांधी ने युवाओं से माफी की किसी अपेक्षा को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब उन्होंने कुछ गलत किया ही नहीं तो माफी क्यों मांगें। उनके मुताबिक पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना, दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की मांग करना और अपने भविष्य की सुरक्षा मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के घरों तक कथित रूप से दबाव पहुंचाए जाने की शिकायतों पर भी तीखी आपत्ति जताई और कहा कि युवाओं को डराने के बजाय सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।

अब सवाल सिर्फ NEET का नहीं—20 जुलाई को क्या हुआ, देश जवाब चाहता है

NEET पेपर लीक से शुरू हुआ यह आंदोलन अब परीक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर विरोध के अधिकार, पुलिस की जवाबदेही और युवा असहमति से सरकार के व्यवहार जैसे बड़े प्रश्नों से जुड़ गया है। राहुल गांधी के सामने सामने आए युवाओं के आरोपों को बिना जांच अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता, लेकिन उनकी गंभीरता ऐसी है कि उन्हें केवल राजनीतिक बयान कहकर नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासकर महिला प्रदर्शनकारियों से कथित बदसलूकी, लाठीचार्ज, पैलेट गन, हिरासत में कथित अपमान और शिकायत के बावजूद FIR न होने के दावों पर संबंधित एजेंसियों से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।

राहुल गांधी ने इस मुलाकात के जरिए लड़ाई की राजनीतिक रेखा साफ कर दी है—उनके मुताबिक कटघरे में प्रदर्शनकारी युवा नहीं, वह व्यवस्था होनी चाहिए जिसने उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया। अब सरकार और पुलिस के सामने भी उतना ही सीधा सवाल है: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर वास्तव में क्या हुआ? यदि बल प्रयोग हुआ तो क्यों, किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर? लोकतंत्र में युवाओं से सवालों के लिए माफी नहीं, सवालों का जवाब मांगा जाना चाहिए।

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