राजनीति/ पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 20 सितंबर 2026
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले TMC के भीतर टिकट और उम्मीदवारों को लेकर घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आ रहा है। शनिवार को रेजीनगर से TMC उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी ने पहले नामांकन वापस लेने का ऐलान किया और करीब दो घंटे बाद ही अपना फैसला बदलते हुए चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस यू-टर्न ने उपचुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी की रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
शनिवार सुबह करीब 10:50 बजे चौधरी ने मुर्शिदाबाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी TMC प्रमुख ममता बनर्जी से शुक्रवार को बातचीत हुई थी और वह शनिवार दोपहर अपना नामांकन वापस लेने की योजना बना रहे थे। उन्होंने इसकी वजह पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव और गिरफ्तारी का खतरा बताया। चौधरी के मुताबिक, कुछ कार्यकर्ता गिरफ्तार भी किए गए हैं और इस स्थिति में उनके लिए चुनाव प्रचार करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को नए चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना पड़ता, इसलिए वह नामांकन वापस लेने पर विचार कर रहे थे।
लेकिन घटनाक्रम ज्यादा देर तक उसी दिशा में नहीं चला। करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे चौधरी ने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने कहा कि उनकी ममता बनर्जी से बात हुई है और अब वह चुनाव प्रचार शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता रेजीनगर में उनके लिए प्रचार करने आएंगे और ममता बनर्जी के भी वहां पहुंचने की संभावना है। इस तरह कुछ ही घंटों के भीतर नामांकन वापस लेने के ऐलान से चुनाव लड़ने की घोषणा तक पहुंचा घटनाक्रम बंगाल की चुनावी राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।
रेजीनगर का यह घटनाक्रम नंदीग्राम में हुए एक अन्य बड़े बदलाव के ठीक एक दिन बाद सामने आया। नंदीग्राम में TMC की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। नामांकन वापस लेने से पहले उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात भी हुई थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी।
नंदीग्राम में TMC के कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया। ईस्ट मिदनापुर पुलिस के मुताबिक, प्रधान के खिलाफ नंदीग्राम थाने में चार लंबित गैर-जमानती वारंट थे। पुलिस ने कहा कि ये मामले हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूत मिटाने, घर में घुसने और हथियारों तथा घातक हथियारों से दंगा करने जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हैं।
कांग्रेस ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि ये मामले 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे और उस समय कई लोगों पर ऐसे मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने वर्षों बाद और खास तौर पर नामांकन दाखिल करने के बाद ही प्रधान की गिरफ्तारी क्यों हुई। कांग्रेस ने कहा कि अगर उसके उम्मीदवार को जेल भेजा जाता है, तब भी पार्टी पीछे नहीं हटेगी और कार्यकर्ता नंदीग्राम में प्रचार जारी रखेंगे।
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मिलन प्रधान इतने वर्षों से फरार चल रहे थे और इन मामलों में उन्हें आरोपपत्रित फरार आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया था। पुलिस अधिकारी के अनुसार, लंबित गैर-जमानती वारंटों को लागू करना चुनाव के दौरान भी जारी रहने वाली कानूनी प्रक्रिया है। पुलिस ने यह भी कहा कि चुनाव और उपचुनावों के दौरान लंबित गैर-जमानती वारंटों के निष्पादन को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से निर्देश मौजूद हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को निर्वाचन आयोग की ओर से आवंटित नए नाम और अस्थायी चुनाव चिह्न का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रेजीनगर में उसका उम्मीदवार उपचुनाव लड़ेगा और अस्थायी चुनाव चिह्न के रूप में फुटबॉल खिलाड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर भी बंगाल की राजनीति में विवाद और कानूनी प्रक्रिया देखने को मिली है।
रेजीनगर में उम्मीदवार का नामांकन वापस लेने और फिर वापस चुनाव मैदान में आने का फैसला तथा नंदीग्राम में उम्मीदवार के नामांकन वापसी, कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन और उसके बाद गिरफ्तारी—इन घटनाओं ने बंगाल के आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। एक तरफ TMC अपने उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस नंदीग्राम में अपने उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठा रही है। पुलिस अपने स्तर पर गिरफ्तारी को लंबित कानूनी प्रक्रिया से जोड़ रही है।
बंगाल के इन उपचुनावों में अब मुकाबला केवल सीटों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि उम्मीदवारों के नामांकन, पार्टी के चुनाव चिह्न, आपसी समर्थन, लंबित कानूनी मामलों और गिरफ्तारी जैसे मुद्दे भी चुनावी माहौल का हिस्सा बन गए हैं। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी का कुछ ही घंटों में फैसला बदलना और नंदीग्राम में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम को और तेज कर दिया है।



